Wednesday, November 19, 2008

खेमसिंह की उलझन: चिचरीकथा..

चड्डी पहनकर फूल कहीं खिलते होंगे, यह बिना चड्डि‍यों का एक स्‍केच है. और बस उतना ही है..



(स्‍केच अपने छोटाकार में असुविधाजनक हो रही हो तो उसे चटकाकर बड़ाकार देख सकते हैं)

4 comments:

  1. अब लग रहा है उतना दूर भी नहीं ..

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  2. मुख-मुद्रा से तो लग रहा है कि नवम्बर भी दूर ही है.

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  3. अच्छी स्केचिंग कर लेते हैं आप तो। लगता है आजकल व्यस्त हैं वर्ना पाडकास्टिंग करते कुछ!

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  4. मतलब जनवरी शायद आए भी या ना आए..

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