Thursday, November 20, 2008

अम्‍मा, माफ़ करो, मैंने झूठ बोला था..

सुआ मासी की उदास संगत में..

अम्‍मा, बिनी झूठ बोलती है. मंटू, सुमेधा और रामगनित सभी झूठ बोले हैं. हम नहीं किये शरीफा कोई और खाये होगा. कांसा का कटोरी का नीचे ढांपा हुआ बेसन का हलुआ भी हम चोरी नहीं किये. फूफा का पाकिट से भी तीन रुपया अस्‍सी पैसा हम नहीं लिये, अम्‍मा. गणेश को कोई कुच्‍छो नहीं बोलता, सबका चोरी हमरे सिर पे डालती हो, खाना नहीं खायेंगे तब जान जाओगी, हां. रातो को नहीं खायेंगे, और फिर सुबहियो भी नहीं, इन फैट, कभीयो नहीं खायेंगे तब्‍ब तुमको अकल बुझा जायेगा. दुबारा बोलके देखो, बोलो, बोलो, घर से उट्ठ के चल जायेंगे, फिर कब्‍बो लौटेंगे नहीं, तब्‍ब?..

souad massi -

4 comments:

  1. आपकी आवाज सुनकर आनन्दित हुये।

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  2. भाई..गज़ब का कोरस इस्तेमाल किये हैं,और दो तीन चार पाँच छै सात का रिदम भी खूब लिये...पर अम्मा को आप मलेशिया और अम्मा जान को मलेशिया ,अल्जीरिया के आलावा स्विटज़रलैन्ड भी ले जाइये...पर ये संगीतमय पॉड्कास्टिग का प्रयोग जम रहा है...कुछ और दर्द भरा ललतरानी हो जाय...हम सुनने को बेकरार हैं...

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  3. भई, आनन्दित तो हमऊ होते भये. :)

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