Sunday, December 7, 2008

हम सबक लेंगे?..

इस बुरे वक़्रत में अच्‍छी बात यह हुई है कि हर तरफ़ झांक-झंकाई, आत्‍ममंथन का सिलसिला शुरु हो गया है. इस अंतरंग अंदरूनी उथल-पुथल से समाज ने सबक क्‍या पाया होगा यह तो ठीक-ठीक हम अगले चुनाव के नतीजों में देखेंगे, फ़ि‍लहाल इस झांक-झंकाई के वृहत्‍तर कलाइडिस्‍कोप के अलग-अलग रंग पकड़ते चलें. ज़रा ग़ौर फ़रमाइये:
"Most of the shouting of the last few days is little more than personal catharsis through public venting. The fact is the politicians has been doing what we have been doing, and as an uber Indian he has been doing it much better. Watching out for himself, cornering maximum resource, and turning away from the challenge of the greater good.

The first thing we need to do is to square up to the truth. Acknowledge the fact that we have been made a fair shambles of the project of nation-building. Fifty million Indians doing well does not for a great India make, given that 500 million are grovelling to survive. Sixty years after independence, it can safely be said that India's political leadership- have badly let down the country's dispossessed and wretched. If you care to look. India today is heartbreak hotel, where infants die like flies, and equal opportunities is a cruel mirage.

Let's be clear we are not in a crisis because the Taj hotel was gutted. We are in a crisis because six years after 2,000 Muslims were slaughtered in Gujarat there is still no sign of justice. This is the second thing the elite need to understand- after the obscenity of gross inequality. The plinth of every society society- since the beginning of Man- has been set on the notion of justice. You cannot light candles for just those of your class and creed. You have to strike a blow for every wronged citizen."
तहलका के ताज़ा अंक में तरुण तेजपाल की तक़लीफ़ी समझ का समूचा निचोड़ यहां पढ़े.

2 comments:

  1. यह सही है कि साठ वर्ष की आज़ादी हमारी आबादी को सम्पन्न नहीं कर सकी। सपन्न वही हुए जो राजा के करीब रहे - भ्र्ष्ट नेता, भ्रष्ठ अधिकारी, भ्रष्ठ व्यापारी -- ये सब उस गरीब जनता के नाम पर गरीब का मुंह मार कर खाते रहे। आज भि परिस्थिति बदली नहीं है।

    ReplyDelete
  2. आप की राय अपेक्षित हैं,------ दिलों में लावा तो था लेकिन अल्फाज नहीं मिल रहे थे । सीनों मे सदमें तो थे मगर आवाजें जैसे खो गई थी। दिमागों में तेजाब भी उमङा लेकिन खबङों के नक्कारखाने में सूखकर रह गया । कुछ रोशन दिमाग लोग मोमबत्तियों लेकर निकले पर उनकी रोशनी भी शहरों के महंगे इलाकों से आगे कहां जा पाई । मुंबई की घटना के बाद आतंकवाद को लेकर पहली बार देश के अभिजात्य वर्गों की और से इतनी सशंक्त प्रतिक्रियाये सामने आयी हैं।नेताओं पर चौतरफा हमला हो रहा हैं। और अक्सर हाजिर जवाबी भारतीय नेता चुप्पी साधे हुए हैं।कहने वाले तो यहां तक कह रहे हैं कि आजादी के बाद पहली बार नेताओं के चरित्र पर इस तरह से सवाल खङे हुए हैं।इस सवाल को लेकर मैंने भी एक अभियाण चलाया हैं। उसकी सफलता आप सबों के सहयोग पर निर्भर हैं।यह सवाल देश के तमाम वर्गो से हैं। खेल की दुनिया में सचिन,सौरभ,कुबंले ,कपिल,और अभिनव बिद्रा जैसे हस्ति पैदा हो रहे हैं । अंतरिक्ष की दुनिया में कल्पना चावला पैदा हो रही हैं,।व्यवसाय के क्षेत्र में मित्तल,अंबानी और टाटा जैसी हस्ती पैदा हुए हैं,आई टी के क्षेत्र में नरायण मुर्ति और प्रेम जी को कौन नही जानता हैं।साहित्य की बात करे तो विक्रम सेठ ,अरुणधति राय्,सलमान रुसदी जैसे विभूति परचम लहराय रहे हैं। कला के क्षेत्र में एम0एफ0हुसैन और संगीत की दुनिया में पंडित रविशंकर को किसी पहचान की जरुरत नही हैं।अर्थशास्त्र की दुनिया में अमर्त सेन ,पेप्सी के चीफ इंदिरा नियू और सी0टी0 बैक के चीफ विक्रम पंडित जैसे लाखो नाम हैं जिन पर भारता मां गर्व करती हैं। लेकिन भारत मां की कोख गांधी,नेहरु,पटेल,शास्त्री और बराक ओमावा जैसी राजनैतिक हस्ति को पैदा करने से क्यों मुख मोङ ली हैं।मेरा सवाल आप सबों से यही हैं कि ऐसी कौन सी परिस्थति बदली जो भारतीय लोकतंत्र में ऐसे राजनेताओं की जन्म से पहले ही भूर्ण हत्या होने लगी।क्या हम सब राजनीत को जाति, धर्म और मजहब से उपर उठते देखना चाहते हैं।सवाल के साथ साथ आपको जवाब भी मिल गया होगा। दिल पर हाथ रख कर जरा सोचिए की आप जिन नेताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं उनका जन्म ही जाति धर्म और मजहब के कोख से हुआ हैं और उसको हमलोगो ने नेता बनाया हैं।ऐसे में इस आक्रोश का कोई मतलव हैं क्या। रगों में दौङने फिरने के हम नही कायल । ,जब आंख ही से न टपके तो फिर लहू क्या हैं। ई0टी0भी0पटना

    ReplyDelete