Tuesday, December 30, 2008

इतना दांत मत चियारो, ससुर, कि मुंह का ओर-छोर पिराने लगे..

कुछ का कुछ पोत दूं? कहीं का कहीं जोत दूं? हिन्‍दी की हुशियारी, चौथी जमातवाली समझदारी पर बाल नोंच लूं? या नीलहा करीखा पोत लूं? सींग उगा लूं? या एह छोर से ओह छोर तक दांत चियारे गाल बजा लूं? भवकाल ठेल दूं? या ठिले हुए अकाल पर आलता का लाल? या जगजीत सिंग का पुरनका, मेहराया ग़ज़ल- फिर इस दिल को बेक़रारी है? कहीं पहुंचेगा ये समाज कि मंडी में खड़ा तीन बकरी, चार भेंड़ और खाली बसीया तरकारी है? जय रघुनंदन राम गोंसाईं, केकरा-केकरा के चप्‍पल सजाईं? बाबू जदुनंदन सिंह का पोतधन जहंवा कहीं हो अदालत का कठहरा में हाज़ि‍र हो? अऊर केतना टैम तक नौटंकी पार्टीक का सलीमा-सीनरी चलेगा? बहुत हुआ चिमरखापना बंद करो अब परदा ऊपर उठेगा कि जी, नीचे गिरेगा?

(ऊपर की कलांतक चिरकुटई माइक्रोसॉफ्ट पेंट जनित-फलित है)

5 comments:

  1. मज़ा आया. कलाकारी भी सुंदर बनी है. शायद हाथ से बनाकर स्केन कर लेते तो और भी अच्छा बनता. नव वर्ष आप और आपके परिवार के लिए मंगलमय हो.
    http://mallar.wordpress.com

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  2. पेंट में अच्छा बना है। अगले साल तक तो जादू करेंगे आप।

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  3. नव वर्ष की आप और आपके समस्त परिवार को शुभकामनाएं....
    नीरज

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  4. जार्ज बुसवा अ मजन लाल खुराना अइसे नहीं चियार पाता था तो दूनो एक संघे आपरेसन कराया कि डिपलोमेसी चलता रहे। खुराना का तो आपरेसन सक्सेस हो गया लेकिन पौलटीस बुसवा का फिट चला। अब देखिए के आपका कैसन चलता है।

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  5. बहुत जबर्दस्त मुस्कान है। २००९ भर बनी रहे फिर चाहे चेहरे की माँसपेशियाँ दर्द ही क्यों न करने लगें! मुस्कान बस चिपकी रहनी चाहिए।
    मिठाई होना चाहते हैं! इस डाइबिटीज़ के युग में! अरे कुछ ओट्स या फीका फल बनने की कामना बेहतर न रहेगी?
    नव वर्ष की शुभकामनाएँ।
    घुघूती बासूती

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