Monday, December 29, 2008

दिसम्‍बर के बाल.. खाल पता नहीं किस कल्‍पना के..

लाईनों में आदमी चौंका दीखेगा?



या लड़की नाराज़?..



याकि मैं ही बेमतलब साल के आख़ि‍र में बाल की खाल निकालता दीखूंगा?..



(स्‍केच को बड़ाकार देखने के लिए क्लिकियाकर अलग खिड़की में खोलें)

6 comments:

  1. नये साल की शुभ कामनाये . वैसे कोई फ़रक नही पडता हर आने वाला पल नया ही होता है ये अलग बात है कि हम उसे बाट कर देखते है :)
    आपकी तमाम अधूरी इच्छाये पूर्ण हो इस नये घोषित पल मे :)

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  2. बहुत बढ़िया ! फिर गाली ! चाहे जबान लड़ाने के बदले में ही !
    बहुत सुन्दर चित्र बनाए हैं।
    घुघूती बासूती

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  3. बहुत खूब!
    लगता है अवकाश का पूरा आनंद ले रहे हैं।

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  4. जनाब पंगापीयूष, छांहदार घुघूतीजी और ताबदार द्वि‍वेदीजी महाराज, आप सबों का शुक्रिया.
    ईश्‍वर करे ताज़ि‍न्‍दगी यूं ही अवकाश रहे, बस बिल-सिल के पैसे के लिए कोई हमारे नाम एक छोटा बैंक खोल दे..

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  5. behatareen sketch.

    Best wishes for 2009

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  6. पिछली लंगीलगाई का डर अभी भी बाकी है ..आगे कुछ न कहेंगे ..नये साल में नये बिल के नये बैंक की शुभकामना भी नहीं कहेंगे..

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