Friday, January 2, 2009

भू‍मैटिंग* : एक पैस्‍टोरल, बेमतलब..

करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ..’, खड़खड़ि‍या हीरो-हौंडा सैकिल पर भिलैनी का खड़खड़ केरीकेच्‍चर जैनरायन भुइंया. सैकिलिया साला पीछे चल रहा है और जैनरायना का म्‍यूजिक आगे दौड़ रहा है!

सगरे अंजोर है जवानी फूट रहा है, जबकि जवानी का दहलीच पर- पुरनका बेमतलब साबुन का पाथर में बदल गईल- कीच जइसन ठाड़ा होके निऊनिया आंख में धुंआ अऊर जिन्‍नगानी में करीखा पोत रही है. तब ले चूल्‍हा में गुल का गोली सजा रही है, गोईंठा तोर-तोर के गोबर हो रही है, आंख से लहर-लहर बहके गाल पर लोर सेटिल हो गया है, लेकिन बेचलित्‍तर चुल्‍हवा का आगी सेटिल नहीं हो रहा..

करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ..’ जैनरायना चुपायेगा नहीं, हो? लछमी टाकी से सलीमा देखके लौट रहा है? मगर लछमिया त् बन्‍न है, हुंआ डकैती हुआ था न जी? टिकिस, नवका फिलिम का पोस्‍टर, टारच-सारच सब गमछा में बांधके, अऊर सगरे इस्‍टाफ को लैटरीन में लाकिंग करके, डकैती पाल्‍टी रेक्‍सा में हाजीपुर का डैरेक्‍सन में फ़रार हो गया था, न हो, बदरुद्दीन?

बेबी कुमारी लंगटा छौंड़ा का देह में खींचके गंजी पहिना रही है. छौंड़ा नाक से पानी छोड़ रहा है. अभी दू मिनिट पहिले नाली में झाड़ा छोड़ रहा था. –‘अऊर खा, हरामी, चाना का भुंजा!’ कान्‍हा पर संड़सी मारते हुए महतारी ने गुस्‍सा दिखाया था, अभी दू मिनिट पहिले. अब दुलार बहा रही थी- ‘हमरा नीमन बेटा है, हमरा राजा बेटा है! इस्‍नो-पौडर कैके हमरा राजकुमार सारुख हो जायेगा, न बिसुन बेटा? तनी कड़ू का तेल मल दीं?’ –‘नै!’ बच्‍चा चिंहुककर अपनी महतारी से अलग होता है..

करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ.. दोना भर जलेबी दिहले जइह ऐ करेजऊ..’ जैनरायना जाने कवन लहर का असर में अइसा लहरीदार तान छेरे है!

पीछे-पीछे कांधा पर बैल का पुरनका पगहा गिराये शंकर मंडल का मैट्रिक फेलियर छौंड़ा छेरता है- ‘हे जैनरायन भइय्या, सैकिलिया के चक्‍का में हावा नै है, ऊ नै लौकीस है, खाली दोनवा का जलेबिये लौकता है?’

- ‘खाली सैकिलिये में काहे ला, बाबू? कंहवा-कंहवा देखें कि हावा नै है? अऊर देखने लगेंगे त् करेजा से गाना बहिरियायेगा, हो? कुच्‍छौ नै लौकेगा, तूहो हावा हो जाओगे, हं! करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ, करेजऊ.. दोना भर जलेबी दिहले जइह ऐ करेजऊ..जियरा उजियारा भरले जइह हे, करेजऊ!’ खड़खड़ि‍या खड़खड़ाती जाती रही.. आत्‍मा में कैसे सूराख़ बनाती रही?

( *भूमैटिंग: ऐसी अव्‍यवस्थित, अस्‍वस्‍थ्‍य क्रिया जहां भू अकबकायी आस-पास जो हाथ आये, जिस शक्ल में आये, उससे भेंट करने लगे, लहालोट लोटमलोट करने लग जाये, उससे भी थके नहीं, फिर हारकार मेट करने लगे.)

8 comments:

  1. Pramodji,
    jab ap kisi ke blog par tipiyane se snkoch naheen karte hain ji...to bhala apke blog par tipiyane men lajayen kahe..so tpiyane aye gaye.
    Bahut khoob pramodji..apke blog par ake ise padh kar vahee sakoon milta hai jo prvanchal pahunch kar milna chahiye.Apnee boli,banee men apne des ka hal janana kise achchha naheen lagega.
    Naya sal apke jeevan ko khushiyon se bhar de is mangal kamna ke sath.
    Hemant Kumar

    ReplyDelete
  2. जैनाराएन के गियान पर मुग्ध हो गए भैयाजी...
    गजब लिखे हैं...

    ReplyDelete
  3. रेणुजी के याद करा गइल इ पोस्ट,ही ही..ही हस्ता काहे है रे पगला,उ भी दिल्ली में रहकर

    ReplyDelete
  4. मैंने तो सोचा था की वोमिटिंग को बिहारी लैंगुएज में भू‍मैटिंग कहते होंगे
    यहाँ तो कुछ और ही माजरा लगता है

    ReplyDelete
  5. नए साल की मुबारकबाद ।

    ReplyDelete
  6. ही ही..ही हस्ता काहे है रे पगला,उ भी दिल्ली में रहकर... commnt par comment kar raha hoo. vinit ji ne sahi likha hai ki hasta hai.... oo bhi dilli me rahkar. Bada gajab likhe hai aap.

    ReplyDelete