Sunday, January 11, 2009

संडे सड़ंगी..



संडे सड़ंगी धिड़िंग-धिड़िंग, पिड़िंग-पिड़िंग, रामा हो रामाs..

आरे मोंकू बुझिबे नाहीं गंजाम जिलार बाबूलाल साड़ंगी वाकि
बाजा बाजैय्या पंडित रामनरायनर सरंगी, मूं हेलि खाली
शुद्ध खांटी संडेर बाजा बजना संडे सड़ंगी, हे रामा हो रामाs..

काम कै-कै मन कच गया, लिख-लिख-लिख हाथ खेंच गिया
अईना देख सिंगार करते, छींट का परदा तान बहार करते, हो
रामा उनसे बतियाते इनको बताते अरे, देखिये न जी, सोहाना है
मालिक, अट्ठाइस कैरेट का सोगहग सोना बहुतै पोराना है, हो
असमान छू लेगा जमीनी जीत लेगा खिल-खिल दांत देखाते
बिलागबानी का नवका उमंग में किलिर-किलिर रंग भरते
पसंद का तरंग में उड़ि‍-उड़ि‍ पतंग बनते, रामा हो रामाs?..

बियफे चोन्‍हाते गांजा धुंआते बुध कचहरी को जूता लगाते
मंगल सलीमा जाते, जी, सोम शिवाला में पीपल का पाता
सजाते शनिचर भऊजी को असपताली चंहुपाते, शुक सजाइल
सेंटाइल फुलमति का परेमधन न पाते, जी, हो रामा हो रामाs?..

संडे सड़ंगी धिड़िंग-धिड़िंग, पिड़िंग-पिड़िंग, रामा हो रामाs..

6 comments:

  1. ढुल पारे बजा बजनिया,ढुल पारे बजा बजा
    मुंडे किलीपिन ,पाए अलीता - लाल-पान चिड़िया टेका।
    -अफ़लू

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  2. आपका यह संडे प्रयोग भी लाजवाब है :)

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  3. :) .... एक कान में उंगली डालकर टेर रहे हैं क्या? बीचे में सड़ंगी की आवाज थम जा रही है...।:D

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  4. जैजैवंती बजय्या जी
    बिलाग बिलोकत भय्या जी

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  5. बोह सात्ती हामें दो दयानिधी कर्तब्ब मार्ग पा डाट जावें। पार सेवा पारोपार में हम जक्कजीवन सापल बना जावें। जैहिंद।

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