Jan 25, 2009

वीडियो की एक ज़रा सी छांह, या ऐसा ही कुछ एक मासूम एहसास..

हाथ के रोंओं को जलाती, अधबीच ट्रैफिक कभी भी गिर पड़ें के लगभग नशीलेपन का एहसास दिलाती गर्म दोपहर (जनवरी अभी खत्‍म भी नहीं हुई, और ऐसी गर्मी, यकीन होता है? मुंबई में यकीन करने, और आप किस्‍मत के मारे बाहर सड़क पर हुए तो उसे देह पर झेलने के सिवा कोई और रास्‍ता नहीं), ज़रूरी नहीं हमेशा अपने पीछे दु:ख ही लाये. कभी थोड़ी कला भी ला सकती है. या लायी है का कम से कम मुगालता तो हो ही सकता है. हो सकता है ऐसी आततायी गर्मी के असर में हुआ हो. तो कितनी कला है वह आप देखकर आप अंदाज़ लगायें.. न लगे तो हमारे हिस्‍से का एक गिलास ठंडा पानी गटक जायें..