Tuesday, January 27, 2009

मोदी, टाटा, मित्‍तल, अंबानी इंक एंड गांधी एट आल..

इन दिनों एक ऑनलाइन विज्ञप्ति सर्कुलेशन में है, विज्ञप्ति रतन टाटा, सु‍नील मित्‍तल, अनिल अंबानी को संबोधित है, जिनके मोदी समर्थन के खिलाफ़ विज्ञप्ति लिखनेवाले ऑनलाइन दस्‍तख़त इकट्ठा करके 30 जनवरी, 2009 सेलुलर साइलेंस दिवस के बतौर मनाने की कामना करते हैं, कि इंडिया इंक को गांधीवादी तरीके से बताया जा सके कि आपके इस फासीवादी कदम का देखिये, जनता कैसे गांधीवादी विरोध करती है! ‘तहलका’ के ताज़ा अंक में समूचे प्रकरण, व क्‍यों इस विज्ञप्ति के पक्ष में वह दस्‍तख़त का समर्थन नहीं करते, पर प्रकाशन चलानेवाले एस आनंद की बड़ी ही रोचक टिप्‍पणी है. उद्योगपति तो अपनी सहूलियत व फ़ायदे के अनुकूल आज़ादी के पहले भी आचरण करते थे, अब भी वही कर रहे हैं, लेकिन विज्ञप्ति का ड्राफ्ट तैयार करनेवालों ने जिस तरह गांधी के नायकत्‍व को अपनी ढाल बनाया है, उस नायकत्‍व में ही आनंद बड़े दिलचस्‍प अंतर्विरोधों की पहचान करते हैं. अंग्रेजी में पूरा लेख आप यहां पढ़ सकते हैं. कृपया पढ़ि‍ये, छोटा व इस मुश्किल समय में गहरी समझ का प्‍यारा निबंध है.

5 comments:

  1. मैं भी इसका स्वागत करता हूँ| कोई भी भारतभक्त भारत का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए| कोई विदेशी , जैसे इटैलियन या चीनी, बेहतर रहेगा|

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  2. हमने तो पहले ही कह दिया था, मोदी अवगुणों की खान है. जिनमें ये एब न हो उसे प्रधानमंत्री बनाएं. कोई सुनता ही नहीं.

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  3. @संजय प्‍यारे,
    मोदी तो जो हैं, सो हैं, आप गुजरातवासी धन्‍य बने रहें उनसे, जैसे ठाकरों की ऐंठ में मुंबईमानुस अपना जीवन सार्थक कर रहे हैं, सवाल यहां मोदी महान का नहीं है, एस आनंद की टिप्‍पणी इंडिया इंक के अन्‍य लौह-फ़ोनरत्‍नों को उनके ट्रक से उतारकर सड़क पर उनके गुणधन गिना रही है, आप कृपया उसपर गौर करें. मन ज़रा स्थिर हो जाये तो कृपया एस आनंद के लेखवाला लिंक पढ़ डालें..

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  4. थोड़ा ज़्यादा ही उतार दी गांधी बाबा की एस. आनंद ने. नाटकीय, बचकाना, बेफजूल में भावुक और अतार्किक होते हुए भी, रंजन कामथ जैसे विरोधो की सार्थकता कम से कम एक डिबेट शुरू करने में तो है ही. शायद हम यही स्तर डिज़र्व करते हैं! ये सब पढ़वाने के लिए बहुत शुक्रिया!हमेशा की तरह विचारोत्तेजक!

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