Tuesday, February 3, 2009

किसके लिए लिखती हूं का जवाब इतना आसान है? आई डोंट थिंक सो..

ए मैसमैराइज़िंग रिवीलेशन बाई फ़ाम तेरिब्‍ब्‍ल ऑफ़ नुवेल लेतरातूर दे हिंदी..

कल लालमदन ने सवाल किया और मैं तब से विस्‍मृत हूं, चमत्‍कृत हूं, इन फैक्‍ट भयाक्रांत हूं, क्‍योंकि अचानक लगता है एक छोटी बच्‍ची को (? छोटी? बच्‍ची? अधेड़ावस्‍था को पीछे छोड़ने के इतने वर्षों बाद अब भी स्‍वयं को छोटी बच्‍ची पुकारने की भोली ज़ि‍द क्‍या एक व्‍यर्थिल, बेमतलब का दुराचार नहीं? ओह, ऐसे व्‍यर्थ के केंचुलों से किस दिन मैं पूर्णरूपेण स्‍वतंत्र हो सकूंगी? किंतु इस देश में स्‍त्री का पूर्णरूपेण स्‍वतंत्र होना कभी संभव होगा? शबाना और आलोकिनी दीदी के जीवन को व्‍यर्थ विगलित होते मैंने स्‍वयं अपनी आंखों नहीं देखा? सारा जीवन ये ज्ञान विदुषियां इस मुग़ालते में रहीं कि वे अपने समय, व समाज से स्‍वतंत्र हैं, और फिर उनका कैसा दुर्दांत, कष्‍टकारी अंत हुआ? आत्‍मा के तल से निकलते उन दर्दसने, मर्मभरे चीखों को मैं कभी भूल सकूंगी?

ओह, ईश्‍वर न करे दुश्‍मनों का भी ऐसा अंत हो! सोचकर राहत होती है कि मैं ऐसी निर्बंध, आज़ाद नहीं, राजीव मेरी पीठ पीछे खड़े रहते हैं कि कभी गिरती मिलूं तो वह संभाल लें! ओह, कितना शुक्रगुज़ार हूं मैं राजीव का, मेरे जीवन में राजीव का संबल न होता तो कैसे अंधेरों में भटक रही होती मैं? लेकिन यह कहना तर्कसंगत होगा कि अब नहीं भटक रही? स्‍त्री के सवाल, उसपर केंद्रित समूचे साहित्‍य की दिशा में एक भोला भटकाव नहीं? पिछली बार ममताजी से मिलने पर उनके आगे भी मैंने यही बात रखी थी कि रवींद्रों के अभाव में हम अपनी विभुतियों को कहां दिशा दे सकते हैं, कैसे दे सकते हैं? ममताजी वॉज़ सो इम्‍प्रेस्‍ड बाई माई ऑब्‍ज़र्वेशन, शी इमिडियेटली आस्‍क्‍ड व्‍हॉई डोंट आई स्‍टार्ट राइटिंग इन इंग्लिश? इट विल गेट मी ए वाइडर ऑडियेंस एंड सोसायटी के साथ एक ज़्यादा मीनिंगफुल संवाद संभव होगा? मैंने स्‍माइल करके कहा था लेट मी थिंक ओवर इट, बट थैंक्‍स इन लोड्स, एनीवेज़, ममताजी, फॉर यूअर कन्‍सर्न! कितना खुश थी मैं उस शाम- कि ममताजी का मुझमें इतना फ़ेथ है, एंड शी सो स्‍पॉनटेनियसली अलाउड मी टू बीकम पॉर्ट ऑफ़ हर इनर कॉटरी! लेकिन इस उम्र में अब अंग्रेजी में शुरू करना, आई रियली डोंट नो? नल्‍ली हैज़ फिनिश्‍ड हाई स्‍कूल, एंड देन, आई एम ऑल्‍वेज़ रनिंग आफ़्टर राजीव, एंड ही इज़ ऑल्‍वेज़ सो बिज़ी दैट वी हार्डली हैव एनी प्रॉपर टाईम टुगेदर, ऐसे माहौल में मैं खाक़ एनिथिंग वर्थवाइल अंग्रेजी में शुरू कर सकूंगी! समटाइम्‍स आई फील सो वर्थलेस एंड वेस्‍टेड, विल आई एवर हैव एनी प्रॉपर ग्रिप ऑन माई लाइफ़? हैव एनी वर्थवाइल राइटिंग? राजीव, विल यू टेक मी आउट ऑफ़ दिस मेस, माई लव? प्‍लीज़, प्‍लीज़, प्‍लीज़?)..

कांट फैदम हाऊ कैन आई गेट डिस्‍ट्रैक्‍टेड सो इज़ीली? लालमदनजी से शुरू करके देखो, मैं बनारस, बीकानेर कहां-कहां निकल गयी! सच्‍ची में एक छोटी बच्‍ची ही तो हूं व्‍हाटेवर अदर्स कॉल मी, ऑर प्रेज़्यूम! बट आई रियली फेल्‍ट सो वल्‍नरेबल इन फ्रंट ऑफ़ लालमोहनजी’ज़ क्‍वेश्‍चन. यही लगता रहा मानो किसी छोटी बच्‍ची, ओके, आई विल स्‍टॉप बिहेविंग लाइक अ लिटिल गर्ल (बट आंट आई वन?), या होम साइंस की स्‍टूडेंट के हाथ आईआईएम का परचा थमाकर कहा जाये कि चल, जवाब दे! कहां से क्‍या जवाब देगी बेचारी, लालमदनजी? आप ही क्‍यों नहीं जवाब देते किसके लिए लिखते हैं? बट लालमदनजी इज़ वन रियल स्‍मार्ट एलेक, फट बोलेंगे मैं ‘लोकतंत्र के फूल’ के लिए लिखता हूं, या ‘मशाल’ के लिए लिखता हूं, दैन देयर इज़ हिज़ ‘चिंगारी’ ऑल्‍सो! लालमदनजी की फिक्‍स्‍ड ऑडियेंस है, फिक्‍स्‍ड इश्‍यूज़ हैं, बट व्‍हेयर डू आई स्‍टैंड? नवम्‍बर हैदराबाद कॉन्‍फ़रेंस में भी आई फ़ेल्‍ट लाइक अ फ़ूल, साऊथ की लड़कियां वर सो आर्टिकुलेट अबाउट व्‍हाटेवर दे वर अप टू, लेकिन माइक पर मेरे बोलने का जब मौका आया, मैंने कांपते-कांपते मार्ता साबातिनी की वियेना मेनिफेस्‍टो का फ़र्स्‍ट पैरा क्‍वोट किया, एंड द सदर्न बिचेज़ स्‍टार्टेड टू मेक सच अ ह्यूज रैकेट, दैट आई कांट टेल, एंड दिज़ इज़ नॉट द प्‍लेस, ऑर ऑकेज़न.. और राजीव, मैंने तुमसे कहा था बी देयर इन हैदराबाद, आई विल नीड यू, लेकिन तुम कहां थे? तुम पीपुल्‍स गैदरिंग के लिए हवाना गये थे! और मैं शर्म के पिट में गिरी जार-जार कितना तो रोती रही थी! व्‍हॉट अ फेलियर माई लाइफ, एंड राइटिंग हैव बीन!

किसके लिए लिखती हूं? टू टेल ऑनेस्‍टली, आई डोंट हैव अ क्‍ल्‍यू. शायद ‘यथासंभव’ और ‘नया सूर्योदय’ के लिए? लिखती हूं?..

4 comments:

  1. चकित हूं 'कंस' के नये अंक में इस महत्‍वपूर्ण दस्‍तावेज़ की कहीं चर्चा नहीं? और न ही 'गृहप्रवेश' में?

    -सांवली रुपाली,
    दंतखोर

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  2. चहलनाहल निरुपमाजी (या अनुपमाजी?) की पचपनपूर्ति पर विशेषांक निकाल रहे हैं, रुपालीजी कृपया अपना अंक अभी से सुरक्षित करा लें.
    मधुकलह, बिजनौर.

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  3. कांट बीलीव इट! मैंने कहा था मेरी उम्र की बात नहीं होगी, एंड यू सी, दे आर सिंगिंग सॉंग्‍स हियर. आई टोल्‍ड यू, राजीव, आई शुड नॉट हैव गौटैन इनटू दिज़ पतनशील एडवेंचर!
    और इतनी लम्‍बी साहित्यिक सेवा के बावजूद अभीतक मेरा नाम लोगों की मेमरी में फुटबॉल बना हुआ है.

    -अपना नाम गुप्‍त बनायी हुई डायरी लेखिका.

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