Sunday, February 8, 2009

कभी तन्‍हाइयों में..



(स्‍केच को बड़ाकार देखने के लिए क्लिकियाकर अलग खिड़की में खोलें)

5 comments:

  1. आपने तो कमाल कर दिया ...और ये कमाल का स्केच है ....


    अनिल कान्त
    मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

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  2. भावनाएं बेहद सुंदर प्रतिलक्षित हो रही हैं. आभार.

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  3. क्षमा करें। मेरे भेजे में तो कुछ भी नहीं आया।

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  4. Pramod Ji,
    achchha aur abhivyaktipoorn sketch banaya hai apne.Badhai.
    Hemant

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