Tuesday, February 3, 2009

एन अर्जेंट रेजोंयडर.. पतनशील स्‍पेशल..

मैत्रेयी गार्गी की कलम से..

सेवा में,
संपादक मंडल,
पतनशील साहित्‍य
केंद्रीय कार्यालय, धनखार


नमस्‍ते, लाल सलाम एटसेट्रा! पंकजजी आजू-बाजू बैठें हों तो कृपया उन्‍हें मेरा हैलो कहिये (अभी तक पतनशील में ही हैं न? नहीं, सोच रही थी मंदी के इस दौर में क्‍या मालूम कहीं पतनशील मैनेजमेंट ने उन्‍हें भी.. ? या पतन से थककर पंकजजी ने स्‍वयं विचार-स्‍थान बदल लिया हो? लेकिन उनकी उम्र में पहुंचकर फिर कहां आदमी इतनी फेरबदल के लायक बचता है!) ! एनीवे, मैं अपने ख़त के असल पॉयंट पर आती हूं. आज सुबह दफ़्तर पहुंचते ही चैट पर खंडितजी से एक निहायत सीरियस इश्‍यू पर आर्ग्‍यू कर रही थी (द करेंट पोलित ब्‍यूरो डिबेट इन द एनसीपी हम सबके लिए ग्रेट सबक है, एंड आई थिंक वी ऑल शुड लर्न फ़्रॉम ईट!) कि फ़ोन पर पवनजी घन्‍न-घन्‍न करने लगे, मैंने सोचा वही युज़ूअल चिट-चैट होगा एंड आई इग्‍नोर्ड ईट, वैसे भी आई हैव लॉस्‍ट इन्‍टरेस्‍ट इन पवनजी, ही हार्डली हैज़ एनीथिंग वर्थवाइल टू से फॉर लास्‍ट सो मेनी ईयर्स, सो आई वॉज़ हैविंग दिज़ इंटरेस्टिंग आर्ग्‍यूमेंट विद खंडितजी, बट दैट ईडियट- पवनजी- फ़ोन की घंटी बजाये रहा तो हारकर मैंने आनसर किया कि आई नो यू हैव बीन टू काबुल, व्‍हॉट एल्‍स यू वॉंट टू टेल मी? ऑफ़्टर ए लॉंग पॉज़ ईडियट ने पूछा इफ आई हैव सीन द करेंट नंबर ऑफं पतनशील, और जैसाकि है मेरे साथ मैंने कैज़ुअली आनसर किया कि नो, आई हैव नॉट, आई डोंट रीड पतनशील एंड देयर काइंड ऑफ़ लिटरेचर, आई नेवर हैव, एंड यू नो ऑल दिज़, माई लव, टेल मी व्‍हाट इज़ इट दैट यू आर बॉदरिंग मी फॉर?

फिर जाकर पवनजी से मुझे पतनशील में छप रही डायरी श्रृंखलानिरुपमाजी (या अनुपमाजी? आई एम ऑल्‍वेज़ कंन्‍फ़्यूज़्ड बाई हर नेम, बट व्‍हॉई बॉदर इन द फ़र्स्‍ट प्‍लेस? सारे जीवन बुर्ज़ूआ साहित्‍य के सिवा निरुपमाजी (या अनुपमाजी?) ने लिखा क्‍या है?) के शबाना व आलोकिनी दी के गोपन जीवनभेदों को सार्वजनिक तौर पर गंदा करने के कांड की ख़बर हुई, और मैं सच कहूं आपलोगों से (प्‍लीज़, डोंट फॉरगेट टू से माई हैलो टू पंकजजी! वी हैव हैड सच अ नाइस टाईम टुगेदर इन माइसोर इन लेट सेवेंटीज़, ओह, व्‍हॉट अ ग्‍लोरियस रोमैंटिक टाईम इट वॉज़!) मैं सन्‍न हो गयी. नॉट फॉर व्‍हाटेवर क्रैप दैट निरुपमाजी वॉज सेइंग, ऑर इंटेंटेड, बट कि पतनशील ऐसी सामग्री अपने यहां छाप रही है?

पतनशील में वाईडर सोशल इश्‍यूज़ और वीमेंस कन्‍सर्न पर डिसकशन की एक लंबी परंपरा रही है, हाऊ कुड यू गाइस डेवियेट फ़्रॉम सच अ ग्‍लोरियस ट्रेडिशन? निरुपमाजी (या अनुपमाजी?) जानती क्‍या हैं शबाना या आलोकिनी दी के बारे में? शी हैड द बॉल्‍स टू क्‍वोट फ़्रॉम वियेना मेनिफैस्‍टो, एंड ड्रैग पुवर मार्ता टू पुल ऑफ़ हर पैथेटिक आर्ग्‍यूमेंट? जिसका सिर-पैर वैसे भी आजतक किसी को समझ नहीं आया? वॉज़ शी क्रूनिंग इन फेवर ऑफ़ लेस्बियन्‍स ऑर व्‍हॉट? मुझे आज भी यह बात पज़ल करती है कि हैदराबाद में लड़कियों ने निरुपमाजी की (वैचारिक नहीं) फिजिकल मरम्‍मत क्‍यों नहीं की! प्‍लीज़, मार्ता साबातिनी पर एक लम्‍बा लेख पतनशील में छपे अब इसका स्‍ट्रॉंग रीज़न बनता है, इन दिनों एंड फैब में गौहाटी कॉन्‍फ़रेंस को लेकर मैं बहुत व्‍यस्‍त हूं, बट डोंट वरी, मैं समय निकालूंगी! बट अगेन, दिस होल इश्‍यू ऑफ़ शबाना एंड आलोकिनी दी आल्‍सो नीड्स ए वैलिड, क्लियरर, लॉंगर क्‍लैरिफिकेशन, पतनशील ने चिंतनशील महिलाओं के खेमे को बेवज़ह एक उलझन के गड्ढे में लाकर छोड़ दिया है, और अब यह आपलोगों की रेस्‍पॉंसिबिलिटी बनती है कि इस टंटे से उज्‍ज्‍वल, उद्यमशील महिला बहिनों को बाहर निकालें? कांट यू गाइस टेक माई ओल्‍ड राइटिंग ऑन बुर्ज़ूआ डिजेनेरेशन एंड मेक यूअर नोट्स एंड इमिडियेटली पब्लिश इट इन पतनशील?

मैं परसों रोमानिया के लिए निकल रही हूं जहां सिख साहित्‍य के डेवोशनल एसपेक्‍ट पर मुझे एक बत्‍तीस पेज़ का पेपर पढ़ना है, जिसका अभी रफ़ ड्राफ्ट तक तैयार नहीं है, फिर देयर इज़ अ कोर्ट हियरिंग अबाउट माई इनवैलिड डाइवोर्स इन द लेट आफ़्टरनून (मी एंड मिलिंदजी आर टुगेदर अगेन, आपलोगों तक हैपी न्‍यूज़ पहुंची या नहीं? डोंट वरी, पता नहीं था तो अब चल गया! वन ऑफ़ दिज़ डेज़ आई एम गोइंग टू थ्रो अ बिग पार्टी टू सेलिब्रेट अवर ओल्‍ड लव!).

लेकिन इस बेवकूफ निरुपमाजी (या अनुपमाजी?) का करें क्‍या? प्‍लीज़, लेट मी नो अर्लियेस्‍ट पॉसिबल (एंड दैट बास्‍टर्ड लालमदन! अपने को पीपुल्‍स राइटर कहता है! आप जैसे समझदार लोगों ने ऐसे एंटी-पीपुल नेम को अपने यहां पब्लिश होने कैसे दिया? इट ब्रेक्‍स माई हार्ट. पीएस: प्‍लीज़, से माई हैलो टू पंकजजी! एंड प्‍लीज़ टेल हिम नॉट टू कॉल मी ऑन माई होम नंबर, विल यू? आपलोग जानते हो इनस्‍पाइट ऑफ एक्‍सटिरियर अपीयरेन्‍सेस मिलिंद कितना ओल्‍ड स्‍कूल है, एंड वी हैव नॉट इवेन गौटेन टुगेदर प्रॉपरली..) !

यूअर्स ट्रूली, 
मैत्रेयी गार्गी

(लेखिका स्‍वयं को द ट्रू आइडोलॉजिकल इनहैरिटर ऑफ़ आलोकिनी दी बताती हैं, ’दैनिक दुर्दिन’ और ‘माछेर झोल’ में इनके सुलगते लेख बिला नागा पढ़े जा सकते हैं).

8 comments:

  1. सुन्दर, आनन्ददायक, बढिया

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  2. होल्‍ड इट, होल्‍ड इट! क्‍या जी, पतनशील सोल्‍ड इट हो गया क्‍या?
    पतनशील साथियो, क्रांतिकारी जीवन में यह दिन भी देखना बदा था कि मेरे ऊपर सत्‍ता संकायों में नहीं, आपही के यहां कीचड़ उलीचा जाये? और आपलोग उसे अपने यहां प्रश्रय दें? मन तो यही मानने को कर रहा है कि सब उस क्षुद्रमना पंकजप्रताप की शह पर हुआ है! वर्ना इस गार्गी मरेयी की मजाल थी हम पर कीच-प्रच्‍छालन करे? कन्‍वेंट की छतरी व पंचसितारा सुविधाओं के नीचे खड़ी, बढ़ी रेलवे मजदूरों की रोटी पर बड़े, अपने साहित्‍य का नींव चुनवाये हमारे साहित्‍य को गालियां देती हैं? अंग्रेजी, इस्‍पाहानी और चार किरगिज़ क्रिस्‍तानी शब्‍द फेंककर अपने को डेमोक्रेटिक स्पिरिट का बतायेगी और जनता यकीन कर लेगी?
    देखिये, देखिये, जा कहां रही है! रोमानिया जा रही है! चायसेस्‍कू को पब्लिक भूला नहीं है, और न इन गार्गी-टार्गी को भूलेगा! किसको जूल दे रही है कि सिख साहित्‍य का डेवोशन पढ़ने जा रही हैं उधर? जनता जानता नहीं है कि एक रुमैनियन रोमैंटिक कुकुर रखी हैं वहां, उस पर अपना बुढ़ौती बहार लुटाने जा रही है कुलटा?
    सामने आये, आये सामने, करे हमसे बहस! आज जनता देख ही ले अपना आंख से कौन जन साहित्‍यकार है और कौन फ्राड सत्‍ताखार?
    कामरेड लालमदन 'चिंगारी'

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  3. यकीन नहीं होता पतनशील विमर्श को आपलोग इस स्‍तर तक नीचे उतार ले जायेंगे? अगला कदम क्‍या साड़ी और लंगोट उतारना होगा? ओह, कल्‍पना में शर्म से मैं अभी से अपसेट हो रही हूं!
    एक कन्‍सर्न्‍ड सिम्‍पैथिसाइज़र,
    किस कैंप की हूं बताकर क्‍या फ़ायदा

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  4. Lalmadan is a big idiot. always was.
    you stay out of all this stupid muck, Maitreyi di!
    Sminki Pal Parbani,
    Bonn, Germany

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  5. Is it really true that Gargi has got back her ex? Could really Milind be such a joker? Can't he see what sort of woman he was entangled with?
    Swati
    (Milind's ex girlfriend, but publicly a well-kept secret)

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  6. आप सादर आमंत्रित हैं, आनन्द बक्षी की गीत जीवनी का दूसरा भाग पढ़ें और अपनी राय दें!
    दूसरा भाग | पहला भाग

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  7. who is this anand what chap? can't he see what is being sorted out here? what sort of dumbwits one has to deal each minute in this country?
    won't tell me name radical
    from powai, mumbai

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  8. annonimouso apne likhe ho ka parmod chchaom

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