Friday, February 6, 2009

पहली बार पचास साल का आदमी..

बीता हुआ क्‍यों आता रहता है लौटकर? हवा के कमरे होते हैं जिनमें आकर गूंज जाती है फिर हवा की बीती आवाज़ें? क्‍यों आकर गूंजती हैं? फीके पड़ते नाख़ूनों को पढ़ता मन सोचता है यह क्‍या है हवाओं में जो बंधा-बंधा तैरता है गायब होता है फिर आता है वापस, एक बार आकर फिर पूरी तरह एकदम गुज़रता क्‍यों नहीं..

2 comments:

  1. "इतने तो काम पड़े है,
    पचास साल के आदमी के लिए,
    अभी तो अर्ध-शताब्दी बाकी है"

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