Monday, March 30, 2009

बिनाशीर्षक..

लड़की मन के थकाव अपनी उम्र के बंधाव से छूटी एक अनलिखे गाने में खुद को गुनगुनाती, पुराने दायरों से मीलों दूर निकल किसी जादुई वृक्ष की फुनगी पर पहुंच मन के सुफ़्फ़ेद पंखों के सांवले धूल झाड़ती खुद को हैरत से तकेगी, तकती दमकेगी. मटमैलों ख़्यालों में उलझी फिर रोज़मर्रा के लोकल में लौट पुरानी इमारत की तंग सीढ़ि‍यां चढ़ती, उचटे मॉल के पिटे शेल्‍फ़ों से गुज़रती, कंप्‍यूटर कीबोर्ड के कटावों, देर रात आईने की छांहों- खुली आंखों, अवचेतन हर घड़ी उस पुरुष की राह तकेगी जो उसकी आत्‍मा का दलिद्दर हर लेगा, उचटे जीवन, पिचकी पिचकारी सी देह, खालीपन के गहरे सभी खोहों में नये अर्थ भर देगा! मैं मोहब्बत का एक अबूझ झोला उम्र व अकेलेपनों के कंटीले कांधे टांगे, कमज़ोर प‍सलियों में खराब खानों की झांस और तंगहाली में जिये अनगिन सिगरेटों की खांस भरे सरपट दिशाहीन दौड़ता बार-बार गिरता उठूंगा. अपनी फटी आत्‍मा के कसैले जमाव, बेमतलब ख़बरों के जगर-मगर नक़्शों के बीच दुनिया के पहचाने-अपहचाने फैलाव में वह किताब खोजा फिरूंगा जो मुझे मेरे अंधेरों से पार लेगा. मेरे दलदल के नीचे, गहरे तल, हलहल के नीचे चमकते पारों का संसार देगा, तीन सौ वर्ष पुरानी किसी समुराइ भारी तलवार के सनसनाते वार में मेरे सब आलसबंधों को बार लेगा? नशीली आंख पर घिसी चिरकुटई की चम्‍मड़ चादर होगी, लप्‍पड़ों पीटता उसे भूलता होऊंगा, लरजता कि कांख में दबी हदर-हदर उमंगगागर होगी?

(ऊपर की पेंटिंग परमजीत सिंह से साभार)

11 comments:

  1. आपकी लिखावट जैसी वो लड़की....शायद मैं भी...

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  2. बिना शीर्षक सी ज़िन्दगी में कही न कही सभी अपने अपने मन के बीहड़ जंगल में अकेले ही भटक रहे हैं..खालीपन की गहरी खोहो में से खुद ही नया अर्थ निकालना पड़ता है...बाकि सब झूठ...!

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  3. bahut khoob.. behatareen... post

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  4. आपने बहुत ही जानदार बिनाशीर्षक शीर्षक दी है दरअसल हममे से न जाने कितने लोग अपनी जिन्दगी ऐसे ही काट रहे है शायद जिन्दगी का दूसरा पहलु यही है बिना शीर्षक नाट्क मे किरदार का निभाना और अकेलेपन मे भटकते हुये दुनिया से रुखसत हो जाना

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  5. क्या सही लब्ज खींचते हैं आप, चित्र सा बन जाता है.

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  6. चित्र से अधिक शब्‍द

    मंद मंद मन को महका

    शायद बहका रहे हैं।

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  7. Adarneeya Pramod ji ,
    apke blog par pahlee bar aayee hoon.bahut achchha shabd chitra padhne ko mila ...badhai.

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  8. ये पोस्ट तो बिना शीर्षक ही इतना कुछ कह गई, पोस्ट में खालीपन की गहराइयों में से भी कुछ ढूंढने को आतुर लड़की का बड़ा ही सुंदर चित्रण।
    ...एक और बात बहुत दिन बाद एक टिपिकल अजदकिया पोस्ट पढ़ने को मिली

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