Tuesday, May 5, 2009

अधूरे में अधूरा..

- अच्‍छी बात है, नहीं करूंगा. मालूम है दीना चाचा के बारे में ज़बान से कोई भी बुरी बात निकाले- मैं, देवेश, सेतु, कोई भी- तुम्‍हें तक़लीफ़ होती है. चाचा के खिलाफ़ अतिरंजना और अप्रीतिकर राय बनाने का अधिकार तुमको और सिर्फ़ तुम्‍हीं को है. और अप्रीतिकर भी कुछ ऐसा-वैसा नहीं, कई बार तो इतने तंज और ज़हरघुले भाव से और इतनी सहजता से कहती रही हो कि बेचारा सेतु तो एकदम रुंआसा हो जाता था, यू रिमेम्‍बर दैट? वन डज़ंट से सच थिंग्‍स, स्‍वीटहार्ट, याद है? देवेश भी कहता आई नेवर अंडरस्‍टैंड दिस गर्ल, मेरे कज़ि‍न के बारे में महीनों फूल-पत्तियां गिराती रही, ऑल्‍मोस्‍ट कभी-कभी तो इतना ओवर-डू करती कि मैं भी पककर कहता कमॉन, रंजू, शी इज़ ऑलराइट.. और फिर एक दिन उस लड़की का वो हाल किया कि मैं कहीं मसूरी ऑर समप्‍लेस कहीं टुअर पर था व्‍हेन शी कॉल्‍ड मी टू इन्‍फ़ॉर्म दैट शी वॉज़ नेवर कमिंग टू माई प्‍लेस अगेन! आई डिडंट इवन नो कि बात हुई क्‍या थी, डेढ़-दो साल बाद रंजू ने कैज़ुअली हंसते हुए बताया था कि इट वॉज़ नथिंग, द ईडियट हैड सेड समथिंग स्‍टुपिड अबाउट एजुकेशन ऑर स‍मथिंग और मुझे लगा था कि आज इसका करम किये बिना यहां से निकलने नहीं दूंगी! बीच-बीच में पता नहीं क्‍यों तुम्‍हें लोगों का करम करने का एकदम से बुखार चढ़ता है, क्‍यों रंजू? इस छोटे से नन्‍हे से शरीर में इतना सारा प्‍यार- और इतना गुस्‍सा तुम कैसे, कहां छिपाकर रखती हो इट्ज़ रियली अ बिग पज़ल टू मी!

- स्‍टॉप मेकिंग स्‍टुपिड, रेसिस्‍ट स्‍टेटमेंट्स! वैसे मुझे याद भी नहीं तुम देवेश के किस कज़ि‍न की बात कर रहे हो. इन फैक्‍ट मुझे देवेश की भी अब ठीक-ठीक कोई मेमरी नहीं, आई थिंक आई हैव प्रिटी मच क्‍लीन्‍ड-अप माई सिस्‍टम.

- बट ही वॉज़ नॉट अ बैड गाइ.

- हू सेड एनीथिंग अबाअट हिम बीइंग बैड? मैंने बुरा कहा? किसी को भी बुरा कहा? अगर कहा भी तो आई अम सॉरी. कोई बुरा नहीं होता..

- सिर्फ़ स्थितियां बुरी होती हैं, ब्‍ला-ब्‍ला-ब्‍ला दस स्‍पोक मदर रंजूस्‍थ्रा..

- तुम्‍हें नहीं लगता, भले आदमी, तुम्‍हें सुधर जाना चाहिये, एट लीस्‍ट टिल नाउ आई अम नॉट कॉलिंग यू नेम्‍स. हाथ में कहानी कहने का एक छोटा सा काम लेकर बैठे, देखो, सीधे उतना तक करने की तुम कैसी खराब खिचड़ी पका रहे हो. हैवंड यू लर्न्‍ट ए‍नीथिंग फ्रॉम ऑल दोज़ अमेज़िंग बुक्‍स दैट आई पास्‍ड ऑन टू यू? समटाइम्‍स आई हैव दिस फ़ीलिंग कि यू वुड नेवर हैव अ ग्रिप ऑन इदर यूअर आर्ट.. ऑर यूअर लाइफ़! लेट मी टेल यू दिस, ज़ि‍न्‍दगी में मौके रोज़-रोज़ नहीं आते, माई डियर राजिन्‍दर कुमार!

- यस, यस, वी ऑल नो व्‍हॉटेवर हैपेंड टू अंकल दीना.

- आई आस्‍क्‍ड यू नॉट टू से एनीथिंग नैस्‍टी अबाउट हिम.. ऑर एनीबडी.. इन्‍सपाइट ऑफ़ देयर सिचुएशंस पीपल हैव गोन टू अमेजिंग प्‍लेसेज़, डन अमेजिंग थिंग्‍स विद् व्‍हॉटेवर दे हैव, हैवंट दे? व्‍हॉट स्‍केयर्स यू, मैन, व्‍हॉट? कौन सी चीज़ है जिससे तुम इतना घबराते रहते हो? यू आर नॉट इवन सम छुई-मुई लाइक मी, आर यू?

- शट्अप, रंजू, यू आर मेकिंग मी नर्वस.

- नो, आई वोंट. बीकॉज़ आई हेट टू सी यू बिहेव लाइक सम सिस्‍सी, वेस्टिंग ऑल यूअर एनर्जी रनिंग ऑफ्टर सम स्‍टुपिड गर्ल या सम घटिया राइटिंग. लुक एट ऑल दैट अमेजिंग वर्क दैट दोज़ अफ्रीकन राइटर्स हैव डन, अचेबे, थ्‍योंगो.. यूअर ओन अडोरेबल पेन्‍नाक? तुम्‍हारे अंदर इन्सपिरेशंस के बम फूटने चाहिये, फूटते हैं? डोंट यू फाइंड इट ऑल अटरली शेमफुल?

- तुम मुझे बोर कर रही हो, रंजु.

- आई फ़ील लाइक हिटिंग यू. यू आर अ मिज़रेबल, पिटियेबल परसन, तुम कभी एक चिड़ि‍या का अंडा तक प्रोड्यूस करोगे तुमसे ऐसी उम्‍मीद नहीं करनी चाहिये!

- लेट मी रीड यू समथिंग, शुड आई?

- क्‍या है, तुमने लिखा है?

- नहीं, किसी मेमुआर से क्‍वोट कर रहा हूं.

- ओह, प्‍लीज़, यू आर ऑल्‍वेज़ रनिंग अवे फ्रॉम रेस्‍पोंसबिलिटीज़, मैं यहां तुम्‍हारी लिखायी की बात कर रही हूं और तुम..

- वी विल गैट बैक टू दैट, इसे सुनो न, प्‍लीज़.. आदमी की आज़ादी, उसके चॉयसेज़ के बारे में है..
“..heredity, and the environment that nurtures us, and our social class- these are like cards that are dealt out in a random way before the game begins. There is no freedom about this: the world gives, and you just take what you’re given, with no opportunity to choose. But, the question is what each person does with the cards dealt out to him. Some people play brilliantly with poor cards, and others do the opposite: they squander and loose everything even with excellent cards. And that is what our freedom amounts to: how to play with the hand we have been dealt. But even the freedom to play well or badly depends ironically on each person’s luck, on patience, intelligence, intuition or adventurousness. And in the last resort these too are simply cards that are or are not dealt to us before the game begins. And if so, then what is there left of our freedom of choice?”
(अधूरी)

4 comments:

  1. तुम्‍हें नहीं लगता, भले आदमी, तुम्‍हें सुधर जाना चाहिये, एट लीस्‍ट टिल नाउ आई अम नॉट कॉलिंग यू नेम्‍स. हाथ में कहानी कहने का एक छोटा सा काम लेकर बैठे, देखो, सीधे उतना तक करने की तुम कैसी खराब खिचड़ी पका रहे हो. हैवंड यू लर्न्‍ट ए‍नीथिंग फ्रॉम ऑल दोज़ अमेज़िंग बुक्‍स दैट आई पास्‍ड ऑन टू यू? समटाइम्‍स आई हैव दिस फ़ीलिंग कि यू वुड नेवर हैव अ ग्रिप ऑन इदर यूअर आर्ट.. ऑर यूअर लाइफ़! लेट मी टेल यू दिस, ज़ि‍न्‍दगी में मौके रोज़-रोज़ नहीं आते, माई डियर राजिन्‍दर कुमार!कहीं न कहीं ये बातें आपको भीतर तक छू गयी लगती हैं। बेहूदगी भी कहीं कहीं अपना प्रभाव छोड़ती ही है।

    जमाए रहिए जी।

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  2. हियर आई दू सपोर्ट रंजू, आप सीधे सीधे कहानी कहते क्यूँ नहीं है

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  3. आपका वाक्य विन्यास बहुत अच्छा लगता है ! अर्थ के चक्कर मे मै नही रहता क्योकि गोया इन अर्थपुर्ण लिखने वालो के चक्करो मे ज्यादा अनर्थ हो रहा है :)।

    "हर आदमी अधूरा है इसलिये हर कहानी अधुरी है इसलिये जीवन मे ईवाल्युशन है प्रेसेंट इनपरफ़ेक्ट है और शायद इसलिये जिंदगी मे प्रवाह है !"

    इतने धुर्त ब्लागरो मे आप पहले हो जिसने ये बात कही गोया इसलिये तो आप अजदक है !!

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