Wednesday, June 17, 2009

सड़क पर धूप और छत पर धेनु..

धेनु छत पर खड़ी है. और क़ायदे से मुझे मतलब नहीं होना चाहिये मगर जाने क्‍यों है कि हो रहा है. बिला-वजह फहराया-घबराया लड़की को ललकारता हूं- धेनु, फिर छत पर खड़ी हो! बीस मर्तबा मना किया है भागकर छत मत जाया करो लेकिन, धेनुआ, तू कान देती नहीं है? लड़की छिनककर जवाब देती है, ‘हम दोनों’ के देवालंद वाला आंख है कि बट्टन? खिड़की में खड़े हैं और इनको छत लौका रहा है? और धेनु हमरी दीदिया के नाम है, हमरा रेनु है, बूझे? अब आगे बोलिये!

आंखों पर हाथ की टेक से मैं धूप छेकता हूं- धेनु, मुझे दु:खी मत करो, छत से उतर आओ, जब तक छत पर रहोगी चिन्‍ता में तुम्‍हारे साथ हम छत पर उलझे रहेंगे जबकि बासी कचौड़ी और जाने कौन चीज का साग था खाकर वैसे ही रात को नींद नहीं आई है और सुबह से तीन बार दतुअन कर चुके हैं लेकिन मन का खटास गया नहीं है और तुम्‍हें छत पर देखकर फिर चिन्‍ता हो रही है!

- बड़ अज्‍जब अमदी हैं, जी? हम खिड़की में हैं तब्‍बो जबरदस्‍ती हमको छत्‍ते चढ़ा रहे हैं!

- तुम रेनु हो लेकिन तुमको धेनु बुला रहे हैं, ठीक है, ठीक है, मालूम है पलटकर जवाब देना जानती हो, लेकिन जो जानना चाहिये कि छत पर कैसा-कैसा उल्‍टा काम होता है, तुम्‍हारी जैसी चूनाबुद्धि के लिए मुनासिब ठिकाना नहीं है सो नहीं समझोगी!

- चूनाबुद्धि काहे बोले? क्‍या मतलब हुआ चूनाबुद्धि पहिले उसको समझाइए!

- लेकिन तब से चिचिया रहे हैं चिन्‍ता में हमको कंकाल बना दोगी, छत से नहीं उतरोगी? कौनो खबर है पिछलका साल सोनापुर के दीना काका के छत पर क्‍या हुआ था? और उसके साढ़े चार साल पहले मनोहरा मौसी के छत पर? कौन गजनलीला, क्‍या खेला हुआ था कोई खबर है? तबसे कह रहे हैं बबुनी, बुतरी, उतर आओ, दुलरकी, कोई वजह होगी मगर तुम बूझ रही हो?

- चूनाबुद्धि का पहिले मतबल बताइये!

- धेनुआ, तू आती है नीचे, कि झोंटा खींचके हम खुद नीचे उतारें?

- जाइये, अंगना में इमली सुखा रही है धेनु दीदी झोंटा संवारिये कि कबिता-कहानी का भासा में पुकारिये, हम रेनु हैं, हमको धेनु-धेनु मत बोलिये?

- मैंने चिढ़कर छत पर खड़ी लड़की को ‘मार खाकर रोई नहीं’ की निराला नज़रों से देखा, ध्‍यान बंटाने के लिए जेब के चिल्‍लर पैसों को गिनने लगा कि पता चले मेरे नहाने जाने के दौरान मनोज ने कितने का नुकसान किया है, नुकसान तो जो था सो था पता नहीं लौंडे ने अपने हाथ का लिखा एक उल्‍टा-सीधा प्रेमपत्र मेरी जेब में क्‍यों छोड़ दिया था? मैं समझता था लौंडा मेरे मोबाइल से हलवाई की कंपार्टमेंटल फेल लड़की को एसएमएस करता है मगर यह तो फुलस्‍केल प्रेमपत्र वाला ज़ेहादी समर्पण है, गली में जाने किसकी थी एक साइकिल लुढ़की पड़ी थी, मैं साबुत था मगर किसी भी क्षण लुढ़क ही सकता था, धूप चढ़ रही थी, और लड़की अभी भी वहीं छत पर निर्लज्‍ज जमी थी!

इस बार मैंने धेनु से मनौव्‍वल की- कभी बात सुन लिया करो, धेनु. इतनी धूप पड़ रही है फिर मेरी तबीयत ठीक नहीं है, अंदर वाले कमरे में उघारे बदन टेबल पंखा के सामने बैठूंगा, फिर तुम अच्‍छी धेनु की तरह मेरे लिए बेल का शरबत बनाकर लाओगी, लाओगी न?

- हमको चूनाबुद्धियो बुलाइये और हम आपका बास्‍ते बेल का सरबतो बनायें? दीदी का संगे आंख-मटक्‍का खेलिये, हम रेनु हैं हमको रेनु ही बुलाइये, हं!

काफी कोशिश के बाद मैंने एक खट्टी डकार ली, और सहारे के लिए ढहती दीवार का सहारा लिया.

2 comments:

  1. रेनु-धेनु का चक्कर का है? रेनु तबसे धमकाए जा रही है आपको, आप धेनु को धमका रहे हैं। धेनु इमलियां सुखा रही है। रेनु छत पर टहल रही है...

    संवाद सम्प्रेषण की भयंकर समस्या लग रही है इस मानव-समूह में। कौन किससे मुखातिब है, पता नहीं....

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