Thursday, June 18, 2009

क्‍या कहते हो कवर?..




किताबों के कवर पर कभी पामुक के लिखे चंद नोट्स सजाये थे, आज इन चारेक कवरों को देखकर फिर उसकी याद हो आई.. किताब पढ़ी नहीं है, फिलहाल किताब लिखनेवाले की उन्‍नत पंजाबी-मुसलमानी देह ही देखता रहा हूं. एक, दो, तीन, चार समीक्षाएं हैं पहले वही पढ़ लूं..

1 comment:

  1. पढ़कर बताईयेगा सर जी...फिर हम भी आजमाइश करेगे

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