Saturday, June 20, 2009

हे गिरि‍धारी, सकल बिहारी..

6 comments:

  1. सब अपनी मर्जी के मालिक हैं;))

    ReplyDelete
  2. प्रकृति का केवल एक जीव ही अपनी जीवन लीला स्वयं समाप्त करना चाहता है। प्रकृति को पता होता तो एक बटन भी लगाया होता मनुष्य पर, दबाओ और किस्सा खत्म ! किन्तु फिर चाँद जैसों की समस्या होती। अत: 300 बार एक दिन में दबाओ और किस्सा खत्म का प्रबन्ध होना चाहिए था।
    घुघूती बासूती

    ReplyDelete
  3. ऐसी पोस्ट चढ़ाकर अगर कहेंगे कि; 'लजाइये नहीं' त कैसे चलेगा? मान लीजिये लजाएं नहीं भी त टिपियायें का?

    ReplyDelete
  4. अब इतने दिन बाद आये हैं त लजाएँ का ..कुछौ लिखबा टिपिअईब जरूर ..
    हेमंत कुमार

    ReplyDelete
  5. चलिए टिपिया देता हूँ...

    ReplyDelete