मो यान का लहसुन-गान (कि गाथा? लहसुन-पुरान?) कभी खत्म होगी? किताब खरीदने की तारीख देख रहा हूं मई, 2006, पढ़ने की तारीख याद करता हूं तो याद आता है तीन बार यान की सवारी की थी, मो की मोहब्बत की पानी में उतरा था, लेकिन शायद अभी तीन दिन पहले जैसे एक सहृदय आत्मा ने स्मरण कराया था एक जंगल है यान की आंखों में जहां मैं राह भूल जाता हूं? शायद होगा, क्योंकि किताब में न रम पाने की वह वज़ह तो नहीं ही है जैसा एक दूसरे क्रूरहृदय स्मरण कराना चाहते हैं. क्या होता क्या है कि लेखक को चाहते हुए भी कभी-कभी हम किताब में ठीक से रम नहीं पाते? केन्या के थ्योंगो की ‘पेटल्स ऑव ब्लड’ है कुछ महीने हुए उसके आसपास घूम रहा हूं लेकिन कितनी जल्दी उस मेले से बाहर आ पाऊंगा कहना मुश्किल है. जबकि थ्योंगो का चित्रित संसार उनके चरित्रों की दुविधा उसके परिवेश के सवाल ऐसी दुनिया है वह अफ्रीका है जिसके बारे में भयानक तौर पर अनजान हूं, गहरी जिज्ञासा है बावज़ूद उसके डोंगी अटक-अटक कर आगे बढ़ रही है, क्या है ये? किताब में रमने के ये अक्वायर्ड पश्चिमी संस्कार हैं जो पहचानी बुनावटों से अलग किसी भी नये, अगढ़ अनुभव-लोकों को अलजेबरा का मुश्किल इक्वेशन बना देते हैं? पाठन और पढ़वैये का फिर यह वाजिब लोकतंत्र कैसे हुआ, और नहीं हुआ तो ऐसे सेलेक्टेड लोकतंत्र को लात लगाने के तरीके क्या होंगे?
Jul 27, 2009
मो यान का लहसुन-गान..
मो यान का लहसुन-गान (कि गाथा? लहसुन-पुरान?) कभी खत्म होगी? किताब खरीदने की तारीख देख रहा हूं मई, 2006, पढ़ने की तारीख याद करता हूं तो याद आता है तीन बार यान की सवारी की थी, मो की मोहब्बत की पानी में उतरा था, लेकिन शायद अभी तीन दिन पहले जैसे एक सहृदय आत्मा ने स्मरण कराया था एक जंगल है यान की आंखों में जहां मैं राह भूल जाता हूं? शायद होगा, क्योंकि किताब में न रम पाने की वह वज़ह तो नहीं ही है जैसा एक दूसरे क्रूरहृदय स्मरण कराना चाहते हैं. क्या होता क्या है कि लेखक को चाहते हुए भी कभी-कभी हम किताब में ठीक से रम नहीं पाते? केन्या के थ्योंगो की ‘पेटल्स ऑव ब्लड’ है कुछ महीने हुए उसके आसपास घूम रहा हूं लेकिन कितनी जल्दी उस मेले से बाहर आ पाऊंगा कहना मुश्किल है. जबकि थ्योंगो का चित्रित संसार उनके चरित्रों की दुविधा उसके परिवेश के सवाल ऐसी दुनिया है वह अफ्रीका है जिसके बारे में भयानक तौर पर अनजान हूं, गहरी जिज्ञासा है बावज़ूद उसके डोंगी अटक-अटक कर आगे बढ़ रही है, क्या है ये? किताब में रमने के ये अक्वायर्ड पश्चिमी संस्कार हैं जो पहचानी बुनावटों से अलग किसी भी नये, अगढ़ अनुभव-लोकों को अलजेबरा का मुश्किल इक्वेशन बना देते हैं? पाठन और पढ़वैये का फिर यह वाजिब लोकतंत्र कैसे हुआ, और नहीं हुआ तो ऐसे सेलेक्टेड लोकतंत्र को लात लगाने के तरीके क्या होंगे?