Saturday, August 1, 2009

प्रेरणा कहां से चली आती है.. एंड क्‍यों आती है?..

प्रेरणा कहां से आती है? प्रेरणा को दिखता नहीं उसके इतना आते रहने को मैं टेढ़े खड़ा-खड़ा संभालता रहूं, उतना मेरे जीवन में जगह नहीं है? इस हरामख़ोर बरजोर माचिस की डिब्‍बीमयी जीवन में अपने को टिकाने भर तक की बाज मर्तबा जगह नहीं निकलती? फिर भी प्रेरणा है जैसे फ्रायड को कभी पढ़ा नहीं, युंग के सपनों में झांका नहीं, मुंह उठाये चली आती है.. क्‍यों चली आती हो, बंबई में जगह का ऐसा खंजर मंजर है, बाहर पता नहीं कहां लेकिन कहीं तो खुले हरियाये हरियाले होंगे, जाओ वहीं, दिल लगाओ, अबे, हमपे चढ़ी क्‍यों आती हो, ओह? आं? एक मिनट, अब यह कौन हैं? लो, यह भी हाथ हिलाते आंख नचाते चले आये, अबे?..

अब यह दर्द भी कहां से चला आता है? (हमारे पास कवि ने कहा है आता है दबे पांव के लोक-लाज की मर्यादा में भी नहीं आता, धम्म्-धम्म् गोड़ बजाते हमारा समूचा स्‍वत्‍व हिलाने पहुंच जाते हैं. एक मित्र को कुछ लिखा मेल किया था वह देखकर अवाक हैं, मेरे पास दर्द पहुंचता है मेरी सारी सवाकता धरी रह जाती है) इस तरह से कैसे चला आता है दर्द? चले आने का उसे हक़ है? लेकिन पहले ज़रा प्रेरणा को फरियाते चलें..

हां, तो प्रेरणा सीढ़ि‍यों पर खड़ी है और सन्‍न है. जीवन में ऐसी परिस्थितियां आती हैं कि अच्‍छे-भले आदमी की हंसी जेब में धरी रह जाती है और सन्‍न होने के सिवा चारा नहीं बचता; फिर प्रेरणा जिस तरह मेरे यहां पलीत हो रही है बे-चारीपने में सन्‍नभाव उसकी उपस्थिति का लगभग स्‍थायीभाव हुआ जाता है. अभी भी जो सीढ़ि‍यों पर खड़ी है उसी सन्‍नभाव में ही खड़ी है, आंखें फटी-फटी, चेहरे पर वही पहचाना ‘यू टू, ब्रूटस?’ वाला एक्‍सप्रेशन, ‘तुम्‍हें मालूम हैं यहां कितने हैं मुझसे बात करने तक को तरसते हैं? और तुम, इग्नोमॉनियस, नीच, कहते हो मेरे पास जगह नहीं हैं, दिल में प्‍यार नहीं है? एनी पॉसिबल साथ का संसार नहीं है? जैसा देश है और एक से एक जैसे नमूनों से रोज़ पेश आना पड़ता है आई हैव हैड माई शेयर ऑफ़ सफरिंग, लेकिन इतना गिरा आदमी, ऐसी पिटी नीचता तो पहली बार देख रही हूं? डोंट यू हैव एनी शेम?

प्रेरणा के पीछे सीढ़ि‍यों से प्रतीक्षा सखी कामना के संग गुज़र रही थी, दोनों की चिरकुट चुहलता को बहकी अनमने नज़रों से पीता-पोंछता मैंने थकी आवाज़ में अपना घिसा जवाब दुहराया, ‘आई हैव लॉट ऑफ़ हर्ट, डोंट नो अबाऊट शेम, सॉरी प्रे.’

जैसे इतनी देर से कर-करके अभी थकी नहीं है, प्रेरणा फिर से सन्‍नता वाली एक्टिंग कर रही है (अमरीकावाले सारे माल अपने यहां चले ही आते हैं फिर इतनी खराब एक्टिंग कहां से आती है?), मैं जवाब देने की हालत में नहीं, जहां-जहां दर्द है उसे सहलाता धन्‍य हो रहा हूं. थोड़ा गहरे जाकर महसूसने पर लगता है मित्रलोग जो बात-बात पर अवाक होते रहते हैं, संगत के ग़लत असर में कहीं मैं भी बिगड़ने न लगूं.. ?

बट, दर्द जो आकर बैठ गया है, ठीक है ऐसी ही नियति थी, लेकिन सवाल बना रहता ही है कि आखिर ये प्रेरणा कहां से चली आती है? इतना सारा दरवाज़े पर खड़ा करके सुनवाया है मैंने फिर भी बेहया आती रहती है.. ?

व्‍हाई लाईफ़ विल ऑल्‍वेज़ बी अ स्‍ट्रेंज बिज़नेस जिसपर मेरा हैंडल नहीं होगा.. माने साइकिल किसी तरह डोलती चलती होगी, बट हैंडल-विहीन, दैट सीम्‍स प्रिटी स्‍ट्रेंज, इज़ंट इट?

8 comments:

  1. ग़नीमत आपकी तो आती भी है, इसीलिए इतराकर पूछ रहे हैं कि क्यों आती है!!!!!

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  2. येस इट ईज़, मी लॉड. प्रेरणा का नो लिमिटेशन, इट कम्ज़ वेन सम्टाइम्ज़ देयर इस नो नीड.

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  3. लीडिंग क्वेस्चन है साहब !अदालत में एक अपील डाली जा सकती है .....लेखक लोग इसे बुलाने के लिए पहले होटलों में डेरा डाले रखते थे ...पहाडो की ओर चल जाते थे ..

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  4. aapke paas aati to hai aur aisi ki shayad aapko bhi pata ha ho. khair. Man gazgaza gaya phir. kal bhi to gazgazaya tha. Loan lene wali baat nahi hai abhi is maamle mein. Aapki post ki ek baat pe kabhi likha nahi. vo ye ki post ki jo photu hoti hai o achchi hoti hai.
    thanks

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  5. prerna par agar pabandi lagani hai to no entry ka board lga de sahab... prerna itni behaya bhi nahi...

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  6. wahin kahoon ki kahan bhaag gayi. aap usko seedheeye pe khada rakhiyega. main aake le jaata hoon.

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  7. कल 20/09/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. ofcourse, it's strange!
    ....inspiration comes from unknown realms!!!

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