Wednesday, August 5, 2009

अन्‍हारे-अन्‍हारे..

रात के अन्‍हारे कहंवा-कहंवा त् टहले को निकल लिये. मने बेचैनी थी (कब नहीं होती?) मगर माथा खाली था, हाथ में लोहावाला एगो पुरनका बाल्‍टी था गोड़े चुराईल चटाकी..

कहीं कौनो खटका हुआ अंतर की आवाज एक देवाली से उठके दुसरका ले टकराये होगा, फुआ चदरा हटाके हुंकारी- को है? केहर जाता है?

हमसे आगे-आगे तीन कदम पर हमदम, हमरा जो संगीन सितम चल रहा था, फुसफुसाके बोलीस- जानता है किधर जाता है?

अन्‍हारे गोड़ फैलाते गए, जवाब नहीं दिये.

आत्‍मा आंख का नोक पे लाके रंजू राय सवाल की थी- बाद को तुम पीछे हट गये और हमरी हंसी उड़ी, तब?

लड़ाई का मैदान में संघातिक तीर, भाला, बरछी सब ताने हुए था, रंजू राय अकेले खड़ी थी, हम सात गो कपड़ा का नकाब मुंह पर बांधे थे, कहंवा-कौन जबाब देते?

बिदेसी भासा प्रकासन गृह, पेइचिंग में छन रुंग सन अस्‍सी में कहानी छपवाके सवाल की थी, अर्ल लवलेस फेबर एंड फेबर का पन्‍ना में सन छेयानबे में नून का दाम पूछे, हम अन्‍हारा में हाथ मारते रहे, जबाब दिये?

काठा का बीड़ी सोलगाके खुदी से जिरहबाजी करते रहे कि मरदे, एतना आन्‍हारा काहे है? टहल का रस्‍ता कवन ओर है?

फुसफुस का फूल-पाता सब झरता रहा, धुंधलका का धुआं छोड़ता रहा, जबाब कहंवा था?

4 comments:

  1. हयी भोजपुरी बोल के ना...रौऊआ हमर खून खौला दिया... अनहारे-अनहारे ढेरे मानी चीज़े होखता... ओएेज़ा

    हौऊ ट्रेन भी गुज़रता... इंजिन से सीटीयो मरता... फूलपातिया कलई ले के जाता मरद लागी

    बंपर पोस्ट बिदेसी बोली का... हे देखा... होन्ने गोर्वन सब भी सीखी तबे दू पैसा कमायई. हां-हां अमरीका में...

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  2. का हो मर्दे, तहार बानि छूटी नाहीं का? एतना जलेबी घुमइबऽ त कैसे निबाह होई? तनि बतावा तऽ, का कहल चाहताड़?

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  3. @सिद्धपदार्थ,
    ना भइया, ई बानि त् ना छूटी. तोहर कपार फूटता त् नजीके के कवनो पेड़े चढ़ जा..
    अब एकरा से जादा समझदारी का बोलीं..

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