Saturday, August 8, 2009

दोपहर में सपना..

यह फुरहुरी, चुरमुरी ख़ास विमल की मनचली और अपनी सर्दी की बेकली के लिए..









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4 comments:

  1. भरी दोपहरी में हाथी से उदान भरवा दी आपने.. चित्र तो कमाल है ही पर उनके कैप्शन में जान दाल दी है आपने..

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  2. दूसनका विमल के लिए कि अभय की कहानी के लिए?

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  3. @अरस्‍तू जी,
    लाइफ़ में मिष्‍टि‍ त् जाने कहंवा है, कवनो मिस्‍टरी रहे दीजिएगा कि नहीं?

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  4. eeho thik hai aur ee se pahle wala bhi. sareh me jaane ka man banwa diya.

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