Thursday, September 3, 2009

एक फ़ोटो-सविता (कविता नहीं)..



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(चढ़ते-चढ़ाते नज़र गई आठ सौंवीं पोस्‍ट है, साथ ही इसी बहाने यह भी पता चल गया कि अभी हजार नहीं हुए, हालांकि इस बीच मैं पता नहीं कितने मर्तबे धुआं और धार हुआ.. मचल-मचलकर इस, उस जाने किस-किस फुदकनों पर सवार हुआ.. ओह, बेरोज़गार तो पहले से ही था फिर भी कैसा तो उसका फैला-बढ़ा संसार हुआ.. कैसे, कहां-कहां के जाहिल होंगे अदालत के गलियारों, कॉलेज के पीछे की दीवारों से लगकर लरज़ते आनंद बक्षी का 'ये क्‍या हुआ, कैसे हुआ' की मोहब्‍बत बिसुरते होंगे, मैं 'मुसाफ़ि‍र हूं, यारो, मेरी आवाज़ ही पहचान है' का पतित गमकौवा गुलज़ार हुआ!..

जाने कैसी रिले-रेस है ओर-छोर संजय तिवारी, श्रीसमीर सुकुमार लाल जानते होंगे, मैं जानता हूं, कब से छील रहा हूं, हाय, अब तक हजार न हुआ?)




फोटुओं को दुलराता-सहलाता, साथ ही, ताक पर यह सांगीतिक भी टांक दे रहा हूं, कियोशी कुरोसावा की एक जापानी फ़ि‍ल्‍म से उड़ाया टुकड़ा है, दो घंटे लंबी पूरी तरह संगीतहीन उदास फ़ि‍ल्‍म के एकदम आखिर में सुन पड़ता है, और सुनते हुए, ओह, लतखोर मंजर को कैसी जिजीविषा, गरिमा में सुहाना कर जाता है, मन जब थिर और उदास हुआ बैठा हो तब आप भी सुनियेगा..

16 comments:

  1. बात बन गई है, एक झटके में. एक नई विधा के अंकुर दिख रहे हैं, ब्लॉग स्क्रीनप्ले. लग रहा है कि आपकी क्रिएटिव सीज़न चल रहा है, पहले वालों पर टिप्पणी का गँव नहीं लगा...

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  2. अरे, हम तो आपका ८०० बाँ आँकड़ा देखकर कर ही भयरया गये. उ ज्ञानदत्त जी ७०० कर लिये हैं..यहाँ ३०० के उपर घसीटा मारी मचाये हैं..ससुरा बढ़ता ही नहीं मीटर.

    बधाई तो धर ही लो भईये..ऐसन खुशी के मौके पर!! अब हजारा लगाओ...कुछ गाओ ...

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  3. आठ सौ हो लिये। हजार भी हो जायेंगे। क्या-क्या तो फ़ोटू लगाये हैं! बधाई है जी।

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  4. ये फोटो सविता जो जानदार है.. इंस्पायर करती हुई..

    जल्द ही आप हज़ार पार कर लेंगे..

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  5. @लुकाइल गुमलामदास,
    क्‍या डॉयलाग दागे हैं! "बात बन गई है" और फिर, ओह, "एक झटके में"! जयशंकर प्रसाद बाबू की वह मशहूर कहानी- गुंडा- के अंत-उद्घाटन के खंज़र की नोंक की चुभन की तरह..
    बात बनी, और एक झटके में, लेकिन इस पर कुछ नहीं बोल रहे कि मैं बेखटके में भी कुछ गहरे क्‍यूं नहीं जा पा रहा? जयशंकर बाबू के गुंडा वाला खंज़र न सही, पनामा वाला ब्‍लेड ही बन लेता?

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  6. "जयशंकर बाबू के गुंडा वाला खंज़र न सही, पनामा वाला ब्‍लेड ही बन लेता?"

    The form itself is very attractive and therefore, still many are entangled here, someday we will reach to the content too.

    Keep good work going,

    Is there anything like old "New Yorker" in India? very suitable for that.

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  7. @स्‍वप्‍नदर्शी,
    I wish someone gives a thought to ur wish, पुराना न सही, एक नया NEW YORKER ही शुरू कर दे?

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  8. कभी कभी मैं हैरान होकर सोचता हूँ कितना कुछ है आपके झोली में... रखा हुआ भी... सिर्फ सुनने भर को नहीं है, देखने से लेकर चखने और सहेजने को भी ... आत्मा आनंद हुई आज परमोद बाबू.. आहा!

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  9. अब आठ सौवीं पोस्ट के लिए बधाई-वोधाई का देना है? ऊ सब हैप्पी बर्थडे टाइप हो जाएगा.
    हाँ, ई बात ज़रूर कहेंगे कि झोली कभी खाली न हो.

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  10. @का जी, सीकुमार?
    कलकत्‍ता में चुप्‍पे-चुप्‍पे कागज़ का फूल गो सब छाप रहे हैं, और छुच्‍छे हमरा झोला को भरका बता रहे हैं?
    उदासी का संगीत से आंख में अब लोरो नहीं आता? कलकतिया न्‍यौता हमरी राह पर नज़र में आता? ऊंचे चढ़ाता ?

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  11. आप तो इस रिले रेस से ऊपर कब के उठ चुके है सर जी.....कित्ते गोल्ड मैडल अलमारी में टंगे पड़े है ....बस छिलने की आदत बरकरार रखिये

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  12. इम्प्रेसिव ठाकुर साहेब। बधाई तो खांची भर ले लीजिये; पर सिखा दीजिये हम मिट्टी के माधो को फ़ोटो-सविता बनाना।

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  13. बधाई हो। आठसोवीं के बाद हजारवीं भी। आपकी सृजनशीलता बरक़रार रहे।
    केनवास से मन न भरा हो तो चलाएं कूची, पर हमको तो आपकी पाडकास्ट वाली रचनाशीलता ही याद आ रही है।

    अब तो जितने फोटू बन चुके हैं उनकी पिरदर्शनी लगवा दें। मुंबई में ऐसे भी बहुतेरे हैं कि सोना का मोल लगा देंगे। कह दीजिएगा कि अभी अभी वेनेजुएला से आए हैं...

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  14. आठसौवीं चिट्ठी की बधाई।

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  15. एक तो आंकड़े दिखाकर 'धौंसा' रहे हैं और ऊपर से फोटू-प्‍ले (इस्‍क्रीन प्‍ले) नहीं दिखा के 'नरभसवा' रहे हैं । तनिक बतावैं कि फोटू का सोर्स का है । आपै का कैमेरा है का ।

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  16. @yunus pyare,
    sab net udaya hua maal hai, mitra..

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