Sep 17, 2009

बाबू के बड़के पप्‍पा का परिचय-पोस्‍टर

मुंह बिराना जानते हैं. मटका-मटकी
नयन नचाना, औंजाये गोड़ डोलाना
जब्‍बो-तब्‍बो असहीं गरियाना, गरियाके
फिर गोदी सटाना, दुलराना जानते हैं
बड़के पप्‍पा बाबू को बहुत मानते हैं.

बेख़बर रात-बेरात कबहूं धमक जाना,
चहुंपते ही धमकाना कि जा रहे हैं
चदरी ताने घामा निकले तक नाक
बजाना, उठते ही चाह-चाह के हल्‍ला
फैलाना, ढोंड़ी में मुंह साट के बाजा
बजाना, बाबू से हीहीही ठिरिरी-रिरी
कराना, ठाड़े ढिमिलवाना जानते हैं
बड़के पप्‍पा बाबू को बहुत मानते हैं.

नहाये घर मोम्‍मद रफी बुलाना
मोकेश के मामा का बैंड बजाना
खाये के थाली में फोटो बनाना
नीचे ठाड़े-ठाड़े ऊपरे पेड़ से कूद
जाना, सैकिल पे देख आये ज़माना
के गाना गाके फुसलाना जानते हैं
बड़के पप्‍पा बाबू को बहुत मानते हैं.

बाबू रोता है तो बड़के पप्‍पा चिचियाने
लगते हैं, सच्‍ची में, मने बहुत घबराने
लगते हैं, देखाई में बोलते हैं, अरे
हटाओ ई छौंड़ा को इहंवा से, भीतरे
भीतर थरथराने लगते हैं, बाबू बोलता
है अभी ठरिये, नै जाइये, बड़के पप्‍पा
पप्‍पा बोलते हैं घरे रहेंगे, खायेंगे क्‍या
बाबू को दुलराके अंधारा उजरवायेंगे
पटरी पर गठरी का गोल-गोल गाल
बजायेंगे क्‍या? बाबू, निष्‍ठुर ज़माना है
तुमरे बड़के पप्‍पा दीवाना हैं, शहर में
अंधारे का मंज़र में उनका मेहनतामा है
फेन आयेंगे, आएंगे नहीं तो फेनसा कहां
पायेंगे? गाल का काटा लेके, मुंहे फंसा
हुआ टाफ़ी का साटा लेके, अपने बाबू
को अबहीं कहां पहचाने, पहचानते हैं?
बड़के पप्‍पा अपने बाबू को बहुत
बहुतै बहुत सानते हैं, मानते हैं?