Tuesday, October 20, 2009

क़ि‍स्‍मत-क़ि‍स्‍मत की बात..

“भई, कटोरी तैयार हुआ? संझा तलक हो जाएगा?” कटोरी से मतलब हुक्के की कटोरी. उसी के इंतज़ार में छुन्‍नन तब से इस पैर से उस पैर हो रहे हैं. मगर नामुराद औरत है जाने किस बात का बदला ले रही है! गरदन ऊपर करके फिर चिंहुके, “क्यों? उठकर चले जायें?”

“नहीं, यहां आकर हमारा गला घोंट जाइए!” भीतर से जवाब पल भर के फ़ासले पर आया. सुनकर छुन्नन लाल पलीता हो गए. यह नहीं कि ख़ामोशी से अपना काम करती फिरे, वह तो बदकार नहीं ही करेगी, मुंह से फिचकूर उड़ाये बिना भी गुज़र न होगा!

तबीयत हुई भीतर जाकर जैसे ज़ाहिर कर रही है हरामखोर के आज सचमुच अरमान पूरे कर ही दें, फिर अंजुम और नासिर के मुस्कराते चेहरों के ख़्याल में सीढ़ि‍यों से मुंह फेर यह भी सोचे बाहरी लोगों की हाजिरी में फिजूल क्या औरत जात से उलझना, दूजे इन दिनों पेट से है, अभी कल ही भरी बाल्टी लिये-दिये सीढ़ि‍यों से गिर पड़ी थी, ताश की बाजी के बीचों-बीच रो-रुलाकर सारा माहौल खराब कर दिया था!

“मैमनवा ने आज बड़ी देर कर दी!” नासिर मियां जेब से रेलायंस वाला फ़ोन बाहर करके वक़्त पढ़ने लगे.

“मेमन आज न आवेंगे. अपनी में आप समझ लो जिसमें अटके हुए हैं, पक्की ख़बर है.” अंजुम मुस्कराकर मूड़ी डोलाते रहे.

“क्या?” छुन्नन के यकीन न हुआ, “अबे, आएंगे कैसे नहीं? हम क्या फालतू हैं जो..”

छुन्न्न की बात का किसी ने जवाब न दिया. जवाब की वह उम्मीद कर भी नहीं रहे थे. ऐसी सोचनेवाली बात है भी नहीं कि चार हफ्तों की शादी में मेमन इतना बदले-बदले क्यों हैं. छोटी और नाज़ुक देह पर बारह सेर के कोंहड़े जैसा भारी सिर ढोते मेमन सहरा की बहकी नज़रों में खोकर चार दिन को यारबाजी भूल जायें उसमें क्या ताज़्ज़ुब?

जबकि ठीक उसी वक़्त नब्बे कदम की दूरी पर जवान जिस मुसीबत का सामना कर रहा था, उसके दोस्तों को उसका अंदाज़ नहीं हो सकता था. बाज़ार में बकरी का चारा और अब्बू् की दवाई खरीदते इतनी तैयारी से सोचा था घर पहुंचकर बीवी का हाथ थामें मज़ाक सुनायेंगे, ऐन वक़्त ज़बान धोखा दे गई, कमसिन, सांवली लड़की के आगे हकलाने लगे, मुंह से आखिर को बस इतना निकला, “फिर अं.. ब.. बताएंगे कभी..!”

इस अजीबो-गरीब बेडौल आदमी पर कितनी जल्‍दी छाती में कितना सारा तो प्‍यार उमड़ा आया था, फिर भी जाने किसी और लड़की की बात है, क्या है सोचती सहरा घबरा गई. मन खराब वैसे ही था, थोड़ी देर पहले रसोई में उसके हाथ से सूरन की तरकारी खराब हो गई थी..

लिखनेवाले ने आगे किताब में लिखा (लिखा मूलत: सर्बियन में, जिसका यह अंग्रेजी तर्ज़ुमा हुआ), बात घर से बिगड़ी एक औरत के मुंह बोलवाया, “There are women who only love sons, and there are others who love only husbands. The problem is that a woman immediately senses a man to whom a woman’s mouth is a moustache-binder. All women always go for the same men and always avoid the same men. Like those places on earth where dogs will never bark. And so some men are loved three times—first as sons, then as husbands, and finally as fathers—while others, those who were never loved by their mothers, will never be loved by their wives or their daughters either. Such men excrete and eat at the same time, like turtledoves.”

2 comments:

  1. प्रिंट आउट रख लिया है... कौनो एतराज़ हो हो बताइए....जल्दी...

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  2. some men are loved three times—first as sons, then as husbands, and finally as fathers—while others, those who were never loved by their mothers, will never be loved by their wives or their daughters either. Such men excrete and eat at the same time, like turtledoves.”

    गुरुदेव ई सब कहां से ढूंढ कर ले आते हैं, कितना पढते हैं आप, गोड़ लागी गुरुदेव हम भी इतना सब पढ़ने लगें तो वारे न्यारे हो जाएं ।

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