Tuesday, November 24, 2009

कविता के सूनसान, मैदान, में..

सुनती हो सुन रही हो, कविता? रिक्शे का कोना लिये, गोद में दोना, बात-बात पर मुँह फुलाती, वस्त्र यही पहनूंगी और भाषा मेरी बेस्ट फ्रेंड है उससे प्रॉपरली बिहेव करना के तानों का गाना गुनगुनाती किस दुनिया बहलती, बहती रहती हो, कविता? यही होगा, यही, और ‘यही’ के बाद ‘वही’ की बही के बस्तों पर कब तक गाल की लाली करोगी, ज़ुबान की जुगाली, हूं? कुछ बहकन आती है समझ, बात और वक़्त का बीहड़? फिसलन की ढलान, अंधेरों में छूटे कितने, कई सारे बाण? घुप्प अंधेरिया रात की अचानक कौंधी बिजलियां, करियाये लाल के कई दिनों की जख़्मसनी पसलियां? कि सिर्फ़ अपनी सहूलियत का चिरकुट लैमनचूस चूसना जानती हो, मोहल्ले की गली और गुमटी की रंगीनी में खुद को पहचानना? अपने गुमान की आग में चिनकती कभी शर्म के फूटते कोयलों में भी जलना जानतीं, कविता? मेरे प्रथम पुरुष का दर्प दिखाती, चिन्हाती रहती हो, उसके उदास परायेपन के क़ि‍स्से तार-तार सुलझाके साहित्यिक रवानी का एक अलग ही संगीत बुनना भी ज़रा जानतीं? कभी? कभी अपने लबर-झबर व्यास और केदार-सम्मान के रिक्शे से उतर मुहब्बत की उमग के उस सहज असाधरणता की साइकिल- सवारी करतीं, सामाजिक गलबंहिया न सही, फुसफुसाकर मीठी नज़र के तीन छोटे टेक ही लेतीं, कि तुम्हारी दिलदारी, समय-समाज की गहिन बेक़रारी, और अपनी चोटखायी साहित्यकारी, यारी, में कुछ कहीं यक़ीन होता, कविता?

11 comments:

  1. यथार्त कविता शायद इसी को कहते हैं ........... बहुत लाजवाब ........

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  2. आपकी पोस्ट पढने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है की भूले-बिसरे शब्दों से मिल आता हूँ जो कभी बोलचाल में थे... मसलन... मसलन... गोद में दोना,ज़ुबान की जुगाली,करियाये लाल, चिरकुट लैमनचूस, गुमटी, चिन्हाती, लबर-झबर और गहिन बेक़रारी, और अपनी चोटखायी साहित्यकारी

    यहाँ क्या है ना शहरों में ... चुनिन्दा शब्द बोलने होते हैं.. वो भी नाज़-ओ-अंदाज़ से...

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  3. भाई साहब, किससे बातें कर रहे हो। कविता जी तो काफी पहले जा चुकी हैं।

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  4. लैमनचूस शब्द बहुत वर्षों के बाद सामने आया है
    बचपन में बहुत चूसा था

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  5. ज़मीन सुंघाई आपने...
    जरूरत है, और जुंबिशें भी हैं...
    अच्छा लगा...

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  6. कविता को इस कदर डरा देंगे तो रही सही भी भाग जायेगी !

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  7. कविता से सम्वाद ..मै भी करता रहता हूँ अक्सर .. एक पूरी कविता ही है लेकिन यह अन्दाज़ निराला है .. बधाई ..केदार सम्मान की ।

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  8. @भाई शरद कोकासजी,
    आप बधाई दे रहे हैं, लेते हुए अच्‍छा भी लग लेगा, मगर यह भला किस कल्‍पना के तार के विस्‍तार से आप हमारी तरफ सम्‍मान की बधाई ठेल रहे हैं? यहां केदार क्‍या लक्ष्‍मीबहार अगरबत्‍ती, या ललिता पवार महिला पददोलन पुरस्‍कार से नवाजे जाने का एसएमएस तक नहीं पहुंचा है?

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