Friday, December 4, 2009

फिर भाषा..

एक भाषा होगी संगत में समूचा आसमान होगा
लेकिन फिर उसकी एक सामाजिकता होगी
जिसमें चार लतीफ़े और नौ कुंजियां होंगी
पंडों का पंचांग, क्षेत्रीय सरकारों, अख़बारों
की विज्ञप्तियां होंगी, गांव की सड़क पर रात
आठ के बाद का सूनसान, अपने को कवि
बताते किसी सिरफिरे का करुण-रुदन, एकांतिक
आख्यान होगा, बड़ी दुनियाओं की मौज़ूदगी का
एक गंवई उन्वान होगा, बहरे कभी रात सारी
जगे रहे अपनी धुन में घने रहे तो सुन लेंगे
भाषा की हारमोनियम पर कितना लंबा
मर्सिया-गान हुआ, संभावनाओं नहायी
हंसती-दौड़ती बच्ची थी, ओह, देखते-देखते
किस आसानी, अपने ही आंगन अवसान हुआ.

सिर्फ़ एकवचन के सपनों में दीखता बारिश
के बाद का धुला, खुला चमकता मैदान होगा.

भाषा के तो वास्तविकता में अदरवाइस
फोड़ी होगी, गड़ेगी गड़ती रहेगी, कपड़ों
की गिनकर दो जोड़ी, चेहरे पर अकाल
की गरीबी दुर्निवार, सजीले सुहानों में
श्यामवर्ण की कठुवाई मार, फक्क हंस
देने की बेहया नासमझी, बेज़रुरत शऊर
पैरों पौन तीन रुपये के आलता का
सिगरेट की डिब्बी में धरे पान के बीड़ा
का घटिया सिंगार होगा, शोहदे हंसते
चलेंगे, जैसे आंखमूंदे पंडे बकते
जब-तब उपवास करेगी, भाषा बारह बार
व्याही जाएगी, कोख भरा है भर जाएगा
का शास्त्री जी आशीर्वाद देंगे, आंख मूंदे देते रहेंगे

आशीर्वाद की सरकारी नाव पर फिर जर्मनी
और सुरिनाम जाएंगे, पूरी-नाम और डॉलर
का ईनाम जीमेंगे, बुनिया के पत्तल पर दांत चियारे
राम और बलराम का मशहूर वीडियो बनेगा, इस
दरमियान घर के अत्याचार औ’ पड़ोस के व्यभिचार
में भाषा तीन बच्चे जनेगी, दो अभागी श्यामवर्ण
बेटियां होंगी, एक मुंहजोर बेटा होगा, गली में नून
की दुकान पर नून होगा तेल खरीदने के पैसे न होंगे
हिंदी में अंग्रेजी स्कूल का हिज्जों की गलतियों
से गंजा इश्ते्हार होगा, चीनी सेलफ़ोन पर
आप आए बहार आई’ की चीख़ती अश्लीलता होगी.

8 comments:

  1. प्रात:स्मरणीय कविता !

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  2. हम पहले ही बहुत परेशान हैं . आईना काहे दिखाते हैं . कौनौ सुघड़-सुंदर तस्वीर सांटिये महाराज . बड़ा 'डिप्रेसिंग' सिचुएशन है . हंसी-खुशी,प्रेम-प्यार का कौनौ किस्सा नहीं है का ?

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  3. असली साहित्य त प्रेम-ओम में होता है. ऐना-वैना से अब डेराना छोड़ दिए हैं. अब त ऐना ही डरता है.

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  4. हाहाकार, चीत्कार
    मगर सब दिलचस्प...
    आपकी जै हो..

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  5. आप ऐसे ही लिखते रहे, तो इस परिदृश्य की कुछ संभावनाए घट जायेंगी!

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