Monday, December 7, 2009

हलफनामा..

हां, भोर उनींदे सपना-न्यूज़ में
ख़बर आई है, झूठ नहीं, खांटी
सैकड़ा प्रतिशत सच है, एकदम
रिबन-चोटी की लम्बी रस्सियां
झूल, डकैती करने ही चढ़ा था
बच्चों की खिलौना-रेलगाड़ी में
फिर ग़लती हुई जाने, या कि
पुरानी यादों के प्रेत होंगे
जागे के सपने में दीखे
प्लास्टिक के खेत होंगे
बहका, आंख मूंदे किसी पगलोल
बुढ़ि‍या की लोरी सुनने लगा
हारा, आदत का मारा तीन कविता
में जीवन की पहेली और आदर्श
के पंचांग बूझने लगा, डोले-डोले
ऊंघने लगा, यहीं हुई कि जाने
शुरुआत से ही ग़लती के
सिलसिले थे, इतने में तो मामला
पेरु से निकलकर पेराम्बूंर पहुंच
चुका, इतने में तो हरामख़ोर
हमसे चौदह दर्जा होशियार बच्चे
लुटे डकैत की आंख में धूल फेंक
फेर किये, हमको घेर लिये
धड़ाम-धड़ाम बैलून का बम फोड़े
बेरहम डकैत को वहीं ढेर किये.

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