Tuesday, January 19, 2010

फिर बैतलवा डाल पर..

वापस पॉडकास्‍ट के सुर पकड़ने की कोशिश कर रहा हूं, धीमे-धीमे..

3 comments:

  1. सोचता है आदमी...थोड़ा आगे थोड़ा पीछे चलता है....भाई आपकी आवाज़ में इन दार्शनिक विचारों को सुनना सुखद है.....और ये प्लेयर ? विकास बाबू की देन है क्या...अच्छा है छोटा सा ....भाई हमको भी सिखाईयेगा...

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  2. हां, प्‍यारे, विकास-बम ही है..

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  3. sundar.aaj bahut dino baad aapke likhe aur record kiye ko par sun paa raha hoon to thora achcha hi lag raha hai.

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