सुखी कैसे हों की तकलीफ़देह पड़ताल में जुटे प्रमोद सिंह की नोटबुक..
सपने देखना, और
थककर सोने जाना
जागकर फिर देखना
व्यौहारी, दुनिया-निहारी
कनिया चौंकी पूछे जो
आये किधर से और
जाओगे किधर, बाबू
मीठे लजाकर कहना,
जी, सपना, सपना?