Friday, February 19, 2010

दो लिंक्स..

दो चीज़ें यहां अपने रेफ़रेंस के लिए टांक रहा हूं, पहली कुछ दिनों पहले गोरखपुर में फ़ि‍ल्‍मकार कुंदन शाह से की भूपेन की बातचीत है, भूपेन की बेतैयारी के सवालों का जहां कुंदन की ओर से दिया गया बड़े धीरज, सलीके और व्‍यापक संदर्भों को समेटे बड़ी समझदारी के विस्‍तृत जवाब हैं. दूसरी चीज़ फैज़ के पाठ पर इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय में हिंदी के अध्‍यापक प्रणय कृष्ण की छपी सिलसिलेवार टिप्‍पणी है.

1 comment:

  1. इरफान के ठिकाने पर बोलकर आई कि भूपेन गुड, गुड, तुम्‍हारा गोरखपुर जाना सार्थक रहा तो वहां किसी ने मेरी बात पर कान ही नहीं दिया। यहां भी मुर्दनी छाई है। अरे कोई तो बताए भूपेन को कि अच्‍छा है बॉस। मेरा संदेश पहुंचा दें उस तक, कमेंट पब्लिश करके।

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