Feb 26, 2010

होगा जैसा जितना..

होंगी बहुत सारी कभी बर्फ़ की बरसात नहीं होगी

जैसे स्निग्‍ध सितारों की आभा हमारी आत्‍माओं पर

झरे सारी रात झरती रहे, खुले में नंगे पैर भागें वो

सचमुच की चांदनी रात सी रात कब होगी, नहीं होगी

दिखेगा जीवन नाखुश कुछ झुंझलाया-सा, अचक्‍के

सामने पड़े पुराने गरीब दोस्‍त के मुंह चुराया-सा

हंसना मिलना कमीज़ उतारकर चप्‍पल पहनना

गिलास की शराब होगी, मनबस रस पिये का सुरुर

बने, आंखें खुशी में धंसीं चमकती चकमकायें वो

बातें नहीं होंगी, थरथराती रेशमी रातें

नहीं होंगी, जीवन होगा जैसे बटुली में ढंकी

बसाइन रोटी, गिरते-भहराये बेमुरव्‍वत शब्‍द होंगे

महक-सिंझा सुहाना, समूचा भरपूर गाना नहीं होगा.