Wednesday, April 7, 2010

हिंदी का कवि होगा..

बड़ा भेड़ होगा हिंदी का कवि होगा
लहकेगा, तीन पत्‍ते की डाल के पीछे
बहकेगा, जाने कौन नैतिकता की रास
होगी (रास माने रस्‍सी) कि भाषा की खास
नाद से बंधे होंगे, उसी में फुत्‍कारेंगे, दुम
झारेंगे, जैसे रेलवे की रिर्जव सीट है उससे
हट नहीं सकते, किसी भी सूरत में वाक़ई जैसे
जीवन में जब फटी होती है उस ज़बान में फट
नहीं सकते, बीवी को किसी और बोली में
चुमकारेंगे, बच्‍चे की खातिर कांख-कांखकर
किसी औरे बुलवन में हारेंगे, लेकिन हाथ में
कलम आते ही मां सरस्‍वती की साड़ी, चढ़ी हुई
ताड़ी होने लगेंगे, आप गुनगुनाते रहियेगा मज़रूह
और आनंद बक्षी, साहित्‍याकाश के लिए आप बने
रहियेगा पप्‍पूलाल, वो खिलाड़ी हो लेगे, मतलब
साहित्‍य की वही पुरानी पहचानी चाल होगी, नाक में
बाल और समाज वही अपनी जगह बेहाल होगा.

6 comments:

  1. यह आपने कवि हृदय से लिखा या लेखकीय चेतना से प्रस्तुत किया है ?

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  2. acha chintan he aap ka

    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  3. एक हिन्दी का कवि ही ऐसा लिख सकता है....शुरूआती पँक्तियाँ धमाका करती हैं...."

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  4. समाज वही अपनी जगह बेहाल होगा.....कौन ससुरा समाज बदलने वास्ते लिखता है जी......

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  5. फिलहाल तो मेमेना है भाई हिन्दी का कवि ।

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