Monday, May 10, 2010

दुनियाभर के पगलेटों के लिए सरवांतेस का सपना..


कुछ वज़ह होती होगी कि क्‍यों दुनिया में खुद को समझदारियों का तोपख़ां लगानेवाले, और उनके एक से एक युगीन ‘युगांतरकारी’ कारनामे बिला जाते हैं, और कैसे प्रकट रूप से मामूली दिखनेवाली, अवसादी समय में एक पगलेटी सनक का आख्‍यान, सत्रहवीं सदी के शुरुआत में लिखी गई, पगलेटियों से भरा वृतांत अभी भी जीवन्‍त और मार्मिक अर्थ बुनता रह सकता है.
रात को कमरे में चूहे घुस आये थे और डरकर (जाने वो कौन सी तो शम्‍मी कपूर की फ़ि‍ल्‍म का गाना था) ‘डर लगे तो गाना गाSS’ गाने की बजाय मैं बुरी आवाज़ के दूसरे अभिनेताओं को गाता देखने लगा था, माने डेल वासरमैन के संगीत-नाटक पर आधारित आर्थर हिलर का म्‍यूज़ि‍कल 1972 का ‘मैन ऑफ़ ला मांचा’ देखने लगा था, और जल्‍दी ही पीटर ओ’टूल के पीछे-पीछे सोफिया लॉरेन को अंग्रेजी में गाता देख और खौफ़ खाने लगा था..
एनीवे, फ़ि‍ल्‍म्‍ा जो है सो है, वह यहां प्रासंगिक नहीं, नाटक के भीतर नाटक खेले जा रहे की बुनावट वाली फ़ि‍ल्‍म के कुछ दृश्‍य हैं, बतकहियों के कुछ संवाद हैं कि तड़ से आपके मन के किवाड़ खोल आपको कहीं से लेकर कहीं छोड़ आते हैं. आपके मन में एक समानांतर मानवीय भावलोक बुन लेते हैं जिसके रस में नहाया आपका अंतर्लोक फ़ि‍ल्‍म खत्‍म हो जाती है तब भी उस दुनिया, उस दुनिया के सवालों में रमा रहता है.
एक छोटी बतकही का नमूना देखिए, अपने को ज्ञानी लगानेवाले एक चिरकुट तिलकुट रंग-बुद्धिबाज हैं, सरवांतेस को आड़े हाथों ले रहे हैं, मतलब अपने बुद्धि-वैभव के आनंद में नहा रहे हैं, अपने सैरकाज़्म को समझदारी मान सवाल ठेल रहे हैं.. सरवातेंस पहले शालीनता की सहजदारी में, और बाद में गुस्‍से की खौराहट में ‘पगलेटों’ और ‘पागलपने’ के पक्ष में जवाब दे रहे हैं, नीचे अंग्रेजी के संवाद जस के तस:
बुद्धिराज : But you see, Cervantes, there is a difference... between reality and illusion... and a difference between these prisoners... and your men of lunacy.
सरवांतेस : I'd say rather men whose illusions were very real.
बुद्धिराज : Much the same thing, isn't it, really? Why are you poets so fascinated with madmen?
सरवांतेस : We have much in common.
बुद्धिराज : You both turn your backs on life?
सरवांतेस : (angrily) We both select from life!
बुद्धिराज : A man has to come to terms with life as it is.
सरवांतेस : Life as it is. I have lived for over forty years, and I've seen... life as it is. Pain... misery... cruelty beyond belief. I've heard all the voices of God's noblest creature. Moans from bundles of filth in the street. I've been a soldier and a slave. I've seen my comrades fall in battle... or die more slowly under the lash in Africa. I've held them at the last moment. These were men who saw life as it is. Yet they died despairing. No glory, no brave last words. Only their eyes, filled with confusion... questioning why. I do not think they were asking why they were dying... but why they had ever lived. When life itself seems lunatic, who knows where madness lies? Perhaps to be too practical is madness. To surrender dreams, this may be madness. To seek treasure where there is only trash... too much sanity may be madness! And maddest of all... to see life as it is and not as it should be!
हिंदी में ‘डॉन किहोते’ का एक अनुवाद किन्‍हीं छविनाथ पांडे के अनूठे कर-कमलों से साहित्‍य अकादमी ने छापा था, ऐसा अनोखा अनुवाद है कि हाथ में लेते ही आपको नींद आने नहीं लगती, आ जाती है, हिंदी में एक नया अनुवाद दिल्‍ली की कॉन्‍फ्लुयेंस इंटरनेशल नाम का प्रकाशन है, उसने छापा है, मालूम नहीं कैसा अनुवाद है, मगर किताब अपेक्षाकृत थोड़ी महंगी है (हिंदी में वैसे भी किताब के ज़रा भी महंगी दिखते ही यूं भी लोग साहित्‍य से पल्‍ला छुड़ाकर खुशवंत सिंह का जोकबुक खरीद लेते हैं, या फिर सुरेंद्रमोहन पाठक की किताबों से दोस्‍ती करने लगते हैं..), ज‍बकि अंग्रेजी में सस्‍ती है. वर्ना एकदम सस्‍ते में ही पढ़ने की आप ज़ि‍द ठाने हों तो इस मलयालम अनुवाद को प्राप्‍त करने का सुख उठा सकते हैं..
एक यह गाना है, दुल्‍सेनेया बनी सोफिया लॉरेन के मुंह से सुनकर मौत के खाट पर पड़े सरवांतेस को वापस ज़मीन पर खड़ा कर देती है:
To dream ... the impossible dream ...
To fight ... the unbeatable foe ...
To bear ... with unbearable sorrow ...
To run ... where the brave dare not go ...
To right ... the unrightable wrong ...
To love ... pure and chaste from afar ...
To try ... when your arms are too weary ...
To reach ... the unreachable star ...
This is my quest, to follow that star ...
No matter how hopeless, no matter how far ...
To fight for the right, without question or pause ...
To be willing to march into Hell, for a Heavenly cause ...
And I know if I'll only be true, to this glorious quest,
That my heart will lie will lie peaceful and calm,
when I'm laid to my rest ...
And the world will be better for this:
That one man, scorned and covered with scars,
Still strove, with his last ounce of courage,
To reach ... the unreachable star ...
ईश्‍वर करे हमारे आपके पैरों में भी सामाजिक असंभाव्‍यता के ख्‍वाब देखते रहने की हमेशा ज़रा ताक़त बची रहे, आमीन.

3 comments:

  1. Sapno ko sach karne ka kuch kimiya bhi khojvaiye vipravar...taki vicharuttejana ke aage bhi kuch ho..aur kam uj kam ye bahas to chale ke sahitya/kala sirf sapne dikhane ki khidaki hai ya usse aage khulane vala koi darvaja.

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  2. amazing

    http://madhavrai.blogspot.com/
    http://qsba.blogspot.com/

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