Sunday, June 20, 2010

क्‍लैरिनेट्स..

ऐ क्लैरिनेट, सुनो, सुनो, भई, इस तरह मत बजो, कि हम अपनी सांसों का बजना सुनने लगें? समझते हो, मगर कहां, तुम तो आंख मूंदे गाल फुलाये, अपनी हाय लगाये हो, नहीं, क्लैरिनेट?

ऐ साथी, सुने, इस तरह मत हंसो कि हमारा मन भीज जाये, हम महकने लगें, आईने में देखकर चमकने कि इस उमर हम यह क्या बेहूदगी में बहकते, सुनते हो, साथी?

बरखा रानी, हमारे छाते में तीन सूराख है, डंडी ज़रा लचीली है, यही वज़ह होगी कि तुम छाती फुलाये आती हो तो हम तनिक लजाते हैं, कपड़ा खींचने लगते हैं, चोरी से नज़र चुराते हैं, मगर नेह हमारा तुमसे कैसे भी कमतर नहीं, समझती हो, बरखा रानी?

“To you, I’m a just a fox like any other fox. But if you tame me, we’ll need each other. You’ll be unique in the world for me. And I’ll be unique in the world for you.”

- सांएक्‍जूपेरी के 'छुटके राजकुमार' से.


नीचे पिपिहरी-पिनक पाट्रिस लेकां की फ़ि‍ल्‍म 'हमरे दुलारे दोस्‍त' से उड़ाई गई है.

2 comments:

  1. "अमेज़िंग ...क्या इस पिपिहरी को अपने ब्लोग पर लगा सकते हैं....."

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  2. @दुलारे,
    सिर्फ़ ब्‍लॉगै पर लगाओगे, माथे पर मुकुट की तरह नहीं धार सकते?

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