Wednesday, September 1, 2010

लहकियां: बस ज़रा सी लहरायी हुई..





(स्‍केच को बड़ाकार देखने के लिए कृपया उन्‍हें चटकाकर अलग पृष्‍ठ में खोलें.)

3 comments:

  1. ████████████████████████████████

    मॉडरेशन ? हाह्हः !

    वैसे भी सँदर्भहीन चिस्कीयों पर असँदर्भित टिप्पणी करने के कोई मायने नहीं !

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  2. कहाँ उड़े जा रहे हैं महराज...?
    वर्धा की जमीन पर आइए।
    स्वागतोत्सुक
    (सिद्धार्थ)

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