Friday, October 1, 2010

एवरीवन इज़ एवरीवन, देन हू द हेल इज़ मी?.. एक घोड़ागप्‍प..


रास्‍ते में जगह-जगह आंखों के आगे एक बैनर लहराता रहा, 'अक़ल घास चरने गयस्‍त!', या यह महज़ घोड़े का दृष्टिभ्रम था? जो दीखता सा दिख रहा था वह ख़यालों में पहले कभी देखी तुर्की या फारसी शायर की पंक्ति थी, जो घूम-घूमकर फिर नज़रों के सामने एक दीवानगी का ताना बुन रही थी? संभवत: जंगल के सियाह सन्‍नाटे में अपने टापों से अलग, साउंडट्रैक पर बज रहे मारिया कालास की आवाज़ में पुच्चिनी के आरिया का असर होगा जो घोड़े को मूर्खता की हद तक मदहोश बनाता रहा होगा. यही वज़ह होगी जो बैनर-विचार और संगीत‍ दोनों के असर के बावज़ूद इतनी देर वह अपना हिनहिनाना भूला रहा, और दौड़ की वहशी भूख में सरपट अंधेरों में तब तक दौड़ता रहा जब तक उसके नथुने धुआं और बड़ी आंखें पानीभर न होने लगीं..
वह तो मारिया कालास और पुच्चिनी की मोहिनी से काफी दूर आकर अचानक घोड़े को खबर हुई अंधेरा वैसा तरल और मेलॉडियस नहीं जिसकी सवारी में वह कहां से निकलकर जाने कहां चला आया था.. और अंधेरे के इस जाने किस गहीन छोर पर आकर 'जुएलथीफ़' के क्‍लाइमैक्‍स के देवानंद की तरह सच्‍चाई सामने खुल रही थी कि आप किसी का भरोसा नहीं कर सकते, फ़िल्‍म की नायिका का भी नहीं. हालांकि यह जानने में घोड़े को थोड़ा वक्‍त लगा कि उसका सवार अधबीच जोख़िम से हाथ झाड़कर फ़रार हो चुका है. सिर्फ़ जाना ही घोड़े ने, गो भरोसा करने में अभी भी तक़लीफ़ हो रही थी. समझदार मनीषी कह गए हैं जीवन में आदमी को किसी का भरोसा नहीं करना चाहिए, चार्ली कॉफमन की फ़िल्‍म 'सिनेक्डकी, न्‍यूयॉर्क' में एक पादरी अपने सरमन में दु:खकातर कहता दीखता भी है:
“There are a million little strings attached to every choice you make. You can destroy your life every time you choose. But maybe you won't know for 20 years... and you may never, ever trace it to its source. And you only get one chance to play it out. Just try and figure out your own divorce. And they say there is no fate, but there is, it's what you create. And even though the world goes on for eons and eons... you are only here for a fraction of a fraction of a second. Most of your time is spent being dead or not yet born.

But while alive, you wait in vain... wasting years for a phone call or a letter or a look... from someone or something to make it all right. And it never comes, or it seems to, but it doesn't really. So you spend your time in vague regret... or vaguer hope that something good will come along. Something to make you feel connected. Something to make you feel whole. Something to make you feel loved. And the truth is... I feel so angry. And the truth is... I feel so fucking sad. And the truth is, I've felt so fucking hurt for so fucking long. And for just as long, I've been pretending I'm okay... just to get along, just for... I don't know why. Maybe because no one wants to hear about my misery... because they have their own. Well, fuck everybody. Amen.”
'ओह, यह पादरी की भाषा है? फ़िल्‍म और सांस्‍कृतिक अनुसंधान की भाषा है?', घोड़े को एक बार फिर भरोसा नहीं होता कि उसे सचमुच किसी पर, किसी पर भी, भरोसा करने का अधिकार नहीं. शायद अच्‍छा होता रास्‍ते में वह मकई की बालियों की मोहब्‍बत में न पड़ा होता, जो बाद में- उस छोटी मुस्‍कराती बच्‍ची की ही तरह- भीमकाय विज्ञापनों का तिलिस्‍म साबित हुए. घोड़ा आंखें फेरकर फिर से मारिया कालास और पुच्चिनी के आरिया को याद करने की कोशिश करता है, मगर जैसा यह अनर्थी, अमंगलकारी समय है, एक बार फिर चार्ली कॉफमन की फ़ि‍ल्‍म के अंत का वॉयसओवर अंधेरों में उस पर तीर बरसाने लगते हैं:
“What was once before you, an exciting and mysterious future... is now behind you, lived, understood, disappointing. You realize you are not special. You have struggled into existence and are now slipping silently out of it. This is everyone's experience.Every single one. The specifics hardly matter. Everyone is everyone. So you are Adele... You are Ellen. All her meager sadnesses are yours. All her loneliness. The gray, straw-like hair. Her red, raw hands. It's yours. It is time for you to understand this. As the people who adore you stop adoring you... as they die, as they move on... as you shed them, as you shed your beauty, your youth... as the world forgets you, as you recognize your transience... ...as you begin to lose your characteristics one by one... as you learn there is no one watching you... and there never was, you think only about driving. Not coming from anyplace, not arriving anyplace... just driving, counting off time. Now you are here. It's 7:43. Now you are here. It's 7:44. Now you are gone.”

5 comments:

  1. प्रमोद जी,
    'Synecdoche' का सही उच्चारण सिनेक्डकी है.

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  2. @शुक्रिया भारत भूषणजी,
    सुधार लिया है, उम्‍मीद है अब चार्ली कॉफमैन की आत्‍मा कम दु:खी होगी.

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  3. प्रमोद जी,
    शुक्रिया.थोडा दुःख तो ज़रूर कम हुआ होगा, पर आप 'कॉफमैन' को कॉफमन' कर देंगे तो उनकी आत्मा एकदम तृप्त हो जायेगी:)

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  4. लीजिए, वह भी किया, हुज़ूर.

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