Thursday, January 13, 2011

एक इंटरव्‍यू, एक किताब..

अर्थ संबंधी चिंताओं की बातचीत दिलचस्‍प भी हो आमतौर पर ऐसा होता नहीं. मास्‍को के सामाजिक आंदोलन व वैश्‍वीकरण अध्‍ययन केंद्र के डायरेक्‍टर बोरिस कागारलित्‍स्‍ मगर एक दिलचस्‍प बातचीत किये ले जा रहे हैं. संदर्भ वैश्विक अर्थ संकट का रुसी परिप्रेक्ष्‍य में आकलन है. श्री कागारलित्‍स्‍की से बातचीत पिछले दिनों दिल्‍ली में फ्रंटलाइन पत्रिका के लिए लॉरेंस सुरेंद्र ने की, जिसे आप यहां पढ़ सकते हैं. धीरज धरके कोशिश करें पूरी बातचीत पढ़ डालें.

रुस से अलग हिंदुस्‍तानी अर्थसंसार पर आठ निबंधों का संकलन है हाल में छपी पेंग्विन से अंग्रेजी की इस किताब में, लेखक हैं अमित भादुड़ी, लगे हाथ इस समीक्षा पर भी एक नज़र मार लें.

(फ्रंटलाइन से साभार)

1 comment: