Tuesday, February 1, 2011

इन स्लो मोशन, म्यूज़ि‍कली..

भागती जाती है रेल. पहाड़ों के आंचल में या पानी की सतह पर, किसी पुल की ज़रुरत को धता बताती, हवा की थपकियों की दुलार पर सवार, बाख़ के कन्चेर्तो फाइव इन एफ़ माइनर की मोहब्बत में आंख मूंदे भागती जाती. स्लो मोशन में, समानान्तर छोटी लाइन की पटरियां आपस में गुत्थम-गुत्था हुई पीछे छूटती जाती हैं. घना वो कैसा तो जंगल है लाजवाब सत्रह हज़ार वृक्षों का गाढ़ा ऐंद्रिक, अपनी धुरी पर तीन सौ साठ डिग्री की मादकता में झूमकर डोले जाता, हरे के ऑर्केस्ट्रेशन में रेल के कानों फुसफुसाकर बोल जाता, ‘आज फिर जीने की तमन्ना है?’ एक कोई दीवाना वृक्ष किसी और कोने कहने से बाज नहीं आता, ‘यस, यस, सुना था मैंने, सुन रहा हूं, सुनो तुम भी- माहलर की सिम्फ़नी फाइव इन सी शार्प मेजर.. विस्कोंती की ‘डेथ इन वेनिस’ का क्लाइमैक्स याद है? समूचेपन में जी सकने की उम्मीक में मरना? याद है?’

भागती जाती है रेल. स्लो मोशन में. टाइम और स्पेस के बोध के विधान से बाहर. संगीत की सांद्रता में नहायी मन के मलिन चंचल आसमान में, माहलर की सिम्फ़नी फाइव इन सी शार्प माइनर की पियानो के बेगाने परों पर डोलती, पहचाने संसारों के भूगोल से छूटकर बाहर चली जाती, स्लो मोशन में.

स्ट्रिंग क्विन्टेट अदाज्यो की संगत में सुर की सैर को निकला है, मगर माहलर की सिम्फ़नी फाइव इन सी शार्प माइनर में गहीन घायल उड़ता मैं कहां सुन रहा हूं. ऐरियल शॉट में लहराया लट्ठों की दीवार में एक खुदी खिड़की पर गिरा आता, चौदह वर्षीय कोई बच्ची है, पियानों की टीपों के मार्फत आत्मा के अतल में डूबी, उसकी उंगलियां पढ़ता हूं. म्यूज़ि‍कल शीट के पन्ने फड़फड़ाते हैं. कहीं कोने पुराने हाथ की सधी लिखाई में गुदा दीखता है: ‘स्ताबेत मातर दोलोरोज़ा’. पियानो बजता रहता है. स्लो मोशन में. फटी आंखों पंछी नशे में डूबा थरथराता कांपता कातर गिरा, गिरता जाता है. स्लो मोशन में.

मानुएल बार्रुयेको हंसते आवाज़ लगाते हैं, स्टीव मोर्स की जुगलबंदी में गिटार पर उंगलियां फिराते, ‘यस, इट कुड बी डेथ इन पैटागोनिया, अमोर, सी, सी, के नो?’ अपनी धुरी पर दुनिया तीन सौ साठ डिग्री के कोणों पर घूमी जाती है. बेल्लिनी की नोरमा का कास्ता दीवा मारिया कालास गाये जाती है. स्लो मोशन में. हज़ारों मील दूर किसी हरामी लैंडस्कैप में नीचता के अधम में नहाया वांग कार वाई आंख का काला चश्मा उतारकर हरमखोरी में मुस्कराता है, ‘आर यू डाइंग इन स्लो मोशन, ईडियट?’ खल्वाट माथे के ज़रा बचे बालों को हवा में जलाता मैं बराबर की हरमखोरी में जवाब दिये जाता हूं(या ऐसा कुछ मुझे लगता है), ‘अबे, कांट यू सी, आई एम सोर्टिंग आउट टू लिव इन स्लो मोशन, म्यूज़ि‍कली? कोम्प्रेंदे, अमोर?

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