Tuesday, February 1, 2011

मुंह मत खोलना, साथी



मत बोलना मुंह मत खोलना
खलिये संगीत को धूलि देखाओगे
चौधुरी सलिल मोशाय के चैन हरोगे
बाबू गोलाम मोहम्मद का बैंड बजाओगे
अइसही नहीं बोल रहे मुंह
मत खोलना, मत बोलना

हरमोनिया की टीप के देवार पर चुप्‍पे चढ़ल आना
कांखी में क्लैरिनेट दाबे बैंजो बाज़ार में भेंटाना
राजनी‍त के जंतर-मंतर के अप्‍पन सत्तर कोना
तिरिया-चलित्तर सजाये की जगह, सीधे
संगीती-सुगंधिये में नहलाना, मसाईल रुपैय्या
का हम्मर मेहराईल माथा में समझकारी
का सात फूल खिलाना, साथी
हमको तनी ऊपरी उठाना, ग़ज़ब
मगर मत बोलना, मुंह मत खोलना.

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