Thursday, February 10, 2011

सुखदेव..


- यही नाम है तुम्‍हारा?

- Yes.

- Oh god..

- Yes.

- I mean, really..?

- Yes.

- To think.. the kind of cruel vulgarities parents inflict on us..

- Yes.

- Oh god..

- Yes.

- Doesn’t it bother you?

- Yes.

- I mean.. you are standing in some company, and you introduce yourself to some girl, hi, this is Sukhdev..

- Yes.

- Oh god.. Isn’t is preposterous.. ghastily, horrifyingly vulgar?

- Yes.

- I can not imagine having such a name on my head and carrying on with life..

- Yes.

- But you are?

- Yes.

- Oh god?

- Yes.

***

- ये रास्‍ता कहां तक जाता है?

- जहां तक आप लेकर जाओ.

- अरे, आप तो फिलॉसफ़ी छांटने लगे?

- आपने सवाल ही फिलसॉफिकल पूछा.

- अब आप मेरा मज़ाक बना रहे हैं!

- हो सकता है. हम सब बनाते रहते ही हैं.

- सीधा आदमी, मैं फिलसॉफिकल क्‍या पूछूंगा?

- मगर पूछ रहे थे.

- सड़क कहां जाती है में ऐसा आपको टेढ़ा क्‍या लग गया?

- सड़क के कहीं जाने में ऐसा सीधा भी कुछ नहीं है.

- क्‍या मतलब?

- मतलब यही कि आदमी सिर्फ़ शरीर नहीं है. वही बात सड़क पर भी लागू होती है.

- मीनिंग?

- कि सड़क सूराग है. रहस्‍यलोक का एंट्री पॉयंट है. ये आपकी बुद्धि पर है कि आपके भीतर रहस्‍यलोक का आइडियेशन कितना, कैसा है.

- अरे. ओ रे? आप बात क्‍या कर रहे हो?

- सड़क के बारे में कर रहा हूं.

- आर यू किडिंग? आप शुद्ध मेरा चूतिया काट रहे हो!

- आई अम एक्‍स्‍ट्रीमली सॉरी इफ यू फ़ील दैट वे.

- अरे, एक सीधा सवाल पूछ लिया तो आप नाक में दम कर दोगे?

- नाक में दम, ऑनेस्‍टली, आपको अपनी समझ की वज़ह से हो रही है.

- यू सी, यू आर अगेन मेकिंग फन ऑफ़ मी. आप सिंपली बता नहीं सकते ये सड़क किधर जा रही है?

- कहीं नहीं जा रही. सड़क वहीं खड़ी है जहां हमेशा से खड़ी थी. आप जा सकते थे लेकिन लगता नहीं कभी सकेंगे.

- आई कांट बिलीव इट!

- लेकिन मुझको है. आपके कहीं नहीं जाने में.

***

- और कहां दुख रहा है?

- मुंह में डाकदर साहेब.

- गोड़ दिखाओ?

- अऊर पीठो में बेथा है, डाकदर साहेब..

- आंख दिखाओ.

- कल सोये थे तो पीठ ठीके थे, आज उठले के बाद..

- कांख देखाये को नहीं बोले. आंख दिखाओ, आंख!

- आंख तो जलमे से खराब है, डाकदर साहेब..

- पेसाब ठीक से होता है?

- कहां से होगा, मालिक, हमरा एरिया में पानी के संकट है. तीन दिन पहिले पखाना हुआ रहा.

- भात खाना बंद कर दो. और हरीयल तरकारी, समझे?

- ऊ वइसही बन्‍न है, डाकदर साहेब.

- आखरी हाली मंदिर कब गए थे?

- शिवरात के. छोटना को लावे ला गए थे. ऊ हुआं चप्‍पल चुराये ला गया रहा.

- तू लोक.. घरे केतना सिबलिंग हो?

- घरे का खाके रखेंगे, मालिक. लिंग जेतना गो है, सब शेवाले में है.

- पाकिट खोलके देखो केतना ठो दस का नोट लाये हो. पचसटकियो बाहिर करो!

- पचसटकिया कहां ले देखे के भेंटाता है, डाकदर साहेब, सब दू और एगो रुपिया वाला है..

- केतना है, गिनके बाहिर करो?

- ई एतना दुख जीबन में कहां ले आता है, डाकदर साहेब?

- जनाना के कौन महीना चल रहा है?

- ऊहे जानती होगी, हमसे कुच्‍छो कब्‍बो बताती है हरमखोर?

- तबीयत ठीक है उसकी?

- कब्‍बो थी जो अबहीं रहेगी. बियाह के मवके से गरबराई रही. ठाड़े-ठाड़े ठग के अइसन लइकी से हमको बांध दिये सब.

- पहिले जो टैबलेट दिये थे ऊ सब नियम से खाय रहे हो?

- ऊ आपको बताये नहीं, सब छोटना का बहिन खाये ली थी. आप पेसेन का बाते नै सुनते हैं?

- ठीक है ये लाल वाली दवाई लो, दिन में तीन बखत खाने के बाद- या पहले- जैसा सुभीता हो अपनी जनाना से खाने को कहना. और ये कैपसूल तुम्‍हारे बच्‍चों के लिए.

- छोटना के लिए जरा जादा दीजिएगा, डाकदर साहेब, ऊ बहुतै मरहा छोकरा है, बहुतै झगरा करता है­.

- और ये कोहनी में तुम्‍हें कब से दर्द है?

- आपका आगा कुरसी में बइठे हैं, दरद चालू हो गया, डाकदर साहेब.

4 comments:

  1. Seriously, I could not make head and tail of it . I don't think Sukhdev is something vulgar name, but you made me remember 'Pappu' by this.

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  2. एक और छेदीलाल (या कनछेदीलाल?) की दुखदेवी कहानी...

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  3. शानदार... दूसरा वाला.... एक रिकुवेस्ट है ... पॉडकास्ट सुने बहुत दिन हो गया. आपको क्या लगता है ?

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  4. दूसरा वाला बढ़िया लगा , और मैं समझ भी पाया | आपने लगता है , पहले वाला ऐसे ही दूसरे वाले का उदाहरण सा बना के दिया है | हम भी पहले वाले में पूछ रहे थे, ये सड़क कहाँ जाती है |

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