
अच्छी छपाई और अच्छी बाइंडिंग वाली (सच्ची) कहानी की कापी बाबा के पास थी, जिसका बाबा की ही तरह अब कहीं कोई पता नहीं. यह घटिया चिकने कागज़ वाला संस्करण है जिसके इस्तेमाल से आमतौर पर धार्मिक व अश्लील किस्म के अनुष्ठान पटाये जाते हैं. दुनिया में आने की मेरी इस (झूठी) कहानी को पढ़ते हुए इसलिए किसी भी पाठक के मन में अगर किसी भी तरह से धार्मिक, या अश्लील विचार उत्पन्न हों तो मैं यहां शुरुआत में ही स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि यह विशुद्ध मिसप्लेस्ड असोसियेशन का एक निहायत मामूली मामला होगा, और उससे ज़्यादह की इसे मामलियत अता करनेवाले तथाकथित पाठबाज़ों की बेजा कारस्तानियों (मतलब मेरे अर्थ का अनर्थ करते रहनेवाली डिग्रेडिंग व डिस्गस्टिंग हरकतों) का वैधानिक या अन्य सूरतों में मैं जिम्मेदार नहीं. इन फैक्ट मैं कुछ भी नहीं.
मगर सोचकर अब भी दिल बैठा जाता है कि मेरे हाथ (और आपके किस्मत) चढ़ी ही तो यह (झूठी) कहानी चढ़ी (असल कहानी हमेशा मंत्रालय का वह कौन तो सचिव होता है अपने चूतड़ के नीचे दबाये रहता है, और कॉरपोरेट सांठ-गांठ के विशेष क्षणों में मीडियाबाला का हाथ अपने एक हाथ में दबाते हुए दूसरी से बाहर करता है. यहां सचिव वाला वही रोल बाबा खेल रहे थे. फर्क़ सिर्फ़ यही था कि सचिव का मंत्रालय होता है, मंत्रालय का एक वेबसाइट होता है जहां जाकर आप सचिव की तो नहीं मगर मंत्रालय की खबर ले सकते हैं, जबकि बाबा की मैं कहीं नहीं ले सकता था! द रियल फ़ाईल ऑफ़ द रियल मी लेकर एक देहाती, ज़ाहिल, नटकेस बुड्ढा गायब था और मैं कुछ नहीं कर सकता था. वैसे ही जैसे असल फ़ाईल सचिव की चूतड़ के नीचे दबी रहती है, और होंठों के पीछे अपनी राजकीय हैसियत को मीठी हवा खिलाती महीन मुस्की, और पब्लिक इंटरेस्ट का लिटिगेटर अपने नथुनों से लाख गर्म हवा छोड़ता फिरता है और किसी का कुछ नहीं बिगड़ता. मोस्टली मंत्रालय में बैठे मंत्री और सचिव का नहीं बिगड़ता. इस देश की तकदीर अंगद के पांव की तरह अपनी जगह जमी रहती है. और मैं शर्मिन्दगी में नहाया, सर झुकाया, दुनिया में आने की अपनी- झूठी- कहानी कहने को बाध्य होता हूं. और आप सुनते रहने को).
व्हॉट अ सैड स्टोरी. झूठी हो, बट स्टिल. ईश्वर हम सबकी आत्मा को शांति दे. झूठी कहानियों के सस्ते प्रकाशकों को भी (हालांकि जैसाकि पर्यावरण राज्यमंत्री जैराम रमेश ने पर्यावरण के भ्रष्टाचारियों के खिलाफ़ अपनी हारी हुई लड़ाई की झेंप मिटाने की खिसियाई मुस्कान में हाल ही में कहीं कहा, ‘वी मस्ट बी द ओन्ली कंट्री इन द वर्ल्ड व्हेयर ए मिनिस्टर हिट्स द हेडलाइंस रेगुलरली जस्ट फॉर अपहोल्डिंग द लॉ.’ और पैर हिलाने लगें. कि ईमानदारी से काम करनेवाला एक मंत्री इतनी दूर तक का ही सफ़र कर सकता है और उससे ज्यादा की उम्मीद उसके पागल होने की कामना करने लगना है. हिंदी में अच्छी छपाई की उम्मीद करने लगना कुछ वैसे ही पगलाने लगना है, व्हाई?)
व्हॉट अ फकिंग सैड स्टोरी! एंड यू वुड स्टिल फाइंड हंड्रेड्स ऑफ़ मैग्लौमैनियाक रिटार्ड्स रेजोयसिंग द अशरिंग ऑफ़ अ न्यू एरा ऑफ़ पिटियेबल प्रिंट एंड अ पैथेटिक न्यू रीडरशिप!
व्हॉटेवर. गोभी के पत्तों की ताज़ा, नर्म, और कुछ-कुछ गुदगुदी जगानेवाली छांह के बीचोंबीच मैं दुनिया में चला आया था. बे-चश्मा और देह पर बिना एक वस्त्र के. और बजाय रोने के, हवा में हाथ पटकता हंस रहा था! व्हॉट अ फकिंग सैड स्टोरी. जबकि किसी क्यूबन कॉयर ने या न ही किन्हीं माओ की कमासुत, किसानसुत कन्याओं ने दुनिया में मेरे चले आने की चकितकथा पर ‘तुम जियो हज़ारों साल’ जैसा सेलिब्रेटरी सॉंग गाना शुरु किया था. कलम्मा काकी थी भी तो चार हाथ की दूरी पर थी, आंचल में तीन सलटाने के बाद चौथे गोभी पर हाथ साफ कर रही थी कि मेरी हंसी की आवाज़ से उसका माथा सटका. घबराई अपने पेट को देखा की और फिर चीख़कर वहीं ढेर हो गई. लौटकर कलम्मा काकी की आंख खुली जब मैं मां की गोद में था और तब भी हंस ही रहा था. रो मां रही थी.
दुनिया में आने की मेरी (सच्ची) कहानी में मां के संदेहास्पद आचरण का संभवत: बेहतर खुलासा हो. किसी न किसी दिन वह प्रकाश में आएगा ही. बिना लाये मैं दुनिया से जानेवाला नहीं. यह दीगर बात है कि पर्यावरण की राजनीतिक सच्चाई प्रकाश में लाने के पहले ही ज्यादा संभावना है जैराम रमेश के हाथ से उनका मंत्रालय छिन जाये. इस देश में ईमानदारी से काम करनेवाला मंत्री मंत्रालयों को सोहाता नहीं. बेटा ईमानदार निकल जाये तो बाप के सर पर बोझ हो जाता है. शादी के बाद पत्नी की छाती पर मूंग दलता है. और पत्नी बेचारी सीतला मैया से लेकर सत्यनारायण की कथा करवाते रहने और अपनी फूटी किस्मत पर रोती रहने के लिए मजबूर होती है. ऐसे स्वस्थ राष्ट्रीय सूचकांक की रौशनी में स्वाभाविक है ईमानदार होने की मेरी नैसर्गिक चाहनाएं नहीं हैं. भौतिक भी नहीं. दुनिया में आने की अपनी (सच्ची) कहानी मैं किसी बेईमान रास्ते से ही प्रकाश में लाऊंगा. वैसे पिटे पाठक, कृपया उचित अवसर देखकर मुझे आगाह करें ‘होनहार के होत चिकने हाथ’ मुहावरे को चरितार्थ करते होनहार नौजवान ब्रैडली मैनिंग के विकिकृत्यों को मैं राष्ट्रधर्म के चश्मे से देखूं या बेईमान कर्म के.
दुनिया में आते ही मैंने पहली जो चीज़ करी मां को डांटकर चुप कराया. उसके आगे कहा, ‘यू नो व्हाट, वूमन? आई अम डिस्गस्टेड बाई यूअर बिहेवियर. यू आर हार्डली सेइंग एनीथिंग, आइदर इन सपोर्ट ऑफ़ माई व्यूज़, ऑर इन अपोजिशन. एंड नाउ डोंट टेल मी यू विल बी टॉकिंग टू मी इन दैट गॉड फॉरसेकेन लैंग्वेज?’
घबराई औरत ने मुंह खोला तो वह सचमुच ऐसी ज़बान में बात कर रही थी जिसे दुनिया में सिर्फ़ हिन्दी अधिकारी और अध्यापक समझते हैं, हिंदी कवि जिसमें कविताएं लिखता है, पत्नी की मेहनत किसी और ज़बान में उससे चोरी करता है.
व्हॉट अ फकिंग सैड स्टोरी.
(बाकी)
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अमेजिंग स्टोरी इन प्रोग्रेस
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