Tuesday, January 24, 2012

फिर रात..



तस्‍वीर को बड़ाकार देखने के लिए उस पर क्लिकियाकर उसे नई खिड़की में खोलिए, देखिए..

2 comments:

  1. there is a sort of depth and also a step away from your earlier sketches, cleaner sharper images.

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  2. चित्रों में जो जान है, शब्दों के साए में वो और भी मुखर हो गई है।

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