Tuesday, January 17, 2012

बेलमलल चीरकारी..



तस्‍वीर को कायदे से देखे के लिए क्‍लिकियाके नवके खिड़की में खोलिए (मुंह ओर समिझ पर परदा ढांपे उसे ह्वीं देखिए..)

3 comments:

  1. "अहा, ओही पुरनका ब्लॉग। उकेरा कुछ नया है। "

    ज्ञानदत्‍त पांड़े जी का छोटा, छूटा कमेंट है, इस शक्‍ल में यहां चिपका रहा हूं, मेरे एंड के कुछ टंटे हैं, ज्ञानजी माफ़ी करेंगे..

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  2. मोदनीय पिरमोदनीय
    मोदपिरिय सिंहलोकनीय
    अनुमोदनीय आमोदनीय

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  3. ग्राहक बताता है कित्ते फार्मे छापने को बचे ... और प्रेस ही हमको तक्सीद करता है ... आज कहीं घूमने का नहीं बस यहीं बैठना है... और उ घूमने फिरने का किसी मित्र से भैटीयाने का प्रेस ही डीसाइड करता है... का करें... जब समय होता है - तो बस अपनी तन्हाई से ही बतिआया लेते है और बाकि समय उही फार्मे बनाने और समझाने में उलझे रहते हैं.... और हाँ - उ फोन नम्बर भी कहीं खो गया ... जमाने भर की जुगाली के बीच.

    दिल में ही सही... मुंह से मत बोलिए .... आशीर्वाद बनाए रखिये.. परनाम - परमोद जी

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