Tuesday, February 14, 2012

व्‍हाटेवर डे..

जुसेप्‍पे की दूर-दूर तक कहीं कोई खबर नहीं. मैं भी जाने कहां खोया हुआ. बस पहाड़ों पर दौड़ी जाती एक घुमावदार सड़क है, जिस पर डोलती जाती एक खुशगवार कार, उसके भीतर अंतरंग चुहल का सुखी परिवारी संसार है. सामने की सीट पर ढहे, दुबके, डरे मियां, और स्‍टीयरिंग को संभाले बीवी बैठी, पीछे की सीट पर हुड़दंगी बच्‍चे, बार-बार कार की खिड़की से आधी देह बाहर निकालकर, डियर डैड के उच्‍च रक्‍तचाप को नई ऊंचाइयों तक लिये जाने की सनसनी में निहाल, मालामाल.

या कौन जानता है, जाड़े की इस हाड़-बजाती ठंड में कौन कहां पहाड़ी सड़क पर, जबकि घर ही पहाड़ी बाज़ार बना हुआ हो, बीवी स्‍टोव पर पैर गिराये तलुओं को गरमी दे रही हों, मियां जी आईने के आगे, भारी देह की कमर का हिस्‍से का कपड़ा जरा उठाये, आईने में धंसाये, उंगलियों से पेट टो-टटोल रहे हों, पंजा दबाकर जैसे पेट के अंदर दबी किसे गहरे, आंतरिक दुख का भेद खोल रहे हों? बीवी जी का दिमाग ठंड में यूं ही जकड़ा हुआ, मियां जी की इस टोआ-टोअल्‍ली में और सटकता है, एकदम छूटी तंज का तीर मारती हैं, “तुम डॉक्‍टर को क्‍यों नहीं दिखाते?”
“जानती हो क्‍यों नहीं दिखाता फिर भी पूछती हो. मुझे डर लगता है, सुचित्रा!”
“और जब-तब तुमको पेट दबाते देखती रहूं, मुझे नहीं लगता? चलो, तुम अभी जाओ, फोन करो डॉक्‍टर को?”
“फ़ोन की बैटरी लो है तुम्‍हें बताया नहीं? और.. और आज वैसे भी मंगल है, क्‍लि‍निक बंद रहता है,”
“क्‍लि‍निक नहीं तुम्‍हारा दिमाग बंद रहता है! हमेशा रहता है, सब तुम्‍हारे सिगरेट की वजह से है, सात साल से कह रही हूं छोड़ दो, छोड़ दो, मगर तुम कैसे मेरी सुनने लगे?”
“बस करो, सुचित्रा, दस दिनों से पी रहा हूं? घर में देखा कहीं तुमने सिगरेट..”
“तुम्‍हारे मुंह में देखा था, अभी कल शाम को ही गेट के पास पीते देखा था!”
“अरे, वो तो पम्‍मानी से लेकर एक कश..”
“और परसों सीढ़ि‍यों के नीचे किससे लेकर कश ले रहे थे? तब तो कोई पम्‍मानी रतनानी नहीं था तुम्‍हारे साथ?”
“तुमसे किसने कहा? शुचि ने चुगली की?”
“की तो गलत करी? तुम सुधरोगे नहीं! फिर मत रोना कि डॉक्‍टर ने लंग कैंसर डाइग्‍नोस किया?”
“डॉक्‍टर जो करेगा बाद में करोगे, तुम करो कि इस तरह की बातें बोलकर, डराके यहीं मेरी जान ले लो! इसी डर से डॉक्‍टर के यहां नहीं जाता मगर घर में भी कैसे हो सकता है कि तुम मुझे चैन से रहने दो?”
“मैं तुम्‍हें चैन से नहीं रहने दे रही? मैं तुम्‍हारे पेट में पंजे दबा रही हूं?”
“दर्द कर रहा है तो न दबाऊं?”
“लेकिन सिगरेट पीना न छोडूं? भले पूरी दुनिया के आगे झूठ बोलते फिरो कि कितना मुझको प्‍यार करते हो, बच्‍चों को करते हो..”
“क्‍या मतलब, नहीं करता?”
“सिगरेट को ज्‍यादा करते हो. और ऐसी ही बेचैनी है तो जाओ, बाथरुम में जाकर जो करना है, करो, मेरे सामने अब ये पेट मत दबाओ!”
“तो पेट दबाने के लिए बाथरुम जाऊं, तुम मेरा पेट दबाना तक नहीं देख सकती?”
“हां, नहीं सकती.”
“मैंने तुमसे कभी कहा ये मत करो वो मत करो? छोटे बाल कटवा रखे हैं, बाईस साल की उम्र से स्‍लीवलेस पहनती हो, जाड़े में भी पहनती हो, कभी मैंने मना किया?”
“तुमने नहीं किया तो मैं भी न करुं? तुमको नहीं होगी, मुझे परवाह है, मैं तुमसे प्‍यार करती हूं, तुम करते हो?”
“तो अब ये भी तुम्‍हें बताने की ज़रुरत होगी?”
“तुम्‍हें याद भी है लास्‍ट टाईम कब बताया था?”
“क्‍या बताना था?”
“यही कि मुझे प्‍यार करते हो, ईडियट?”
“क्‍या मतलब, नहीं करता, ऐसा कह रही हो?”
“बंद करो अपना भें-भें, तुमसे कुछ भी कहना बेकार है. पता नहीं तुम्‍हारी अकल कहां रहती है,”
“कहां रहती है?”
“मैं क्‍या बताऊंगी, जाओ डाक्‍टर के पास, वही बताएगा दिमाग का कैंसर है!”
“एक तरफ कहती हो प्‍यार करती हूं और पांच-पांच मिनट में मेरी ओर कैंसर ठेल रही हो, कितनी ममता है तुम्‍हारे अंदर!”
“ममता के लिए मेरे दो बच्‍चे हैं.”
“और मैं नहीं हूं? मैं फिर किसके साथ हूं, कहां हूं?”
“सिगरेट के साथ नहीं हो? जाओ, सीढ़ी के नीचे जाके तीन कश खींच आओ, फिर दुखी होकर लौटना, तुम्‍हारी कहानी सुनूंगी कितना पेट दर्द कर रहा है! डेढ़ घंटे फिर आईने के सामने खड़े जोकरों की तरह खुजाते रहना, मैं देखकर धन्‍य होती रहूंगी? हो सकता है इसी तरह मेरी किस्‍मत में लिखा हो, देखने का कैंसर, मैं छूट जाऊं, तुम्‍हारा सिगरेट थोड़ी छूटेगा?”
“आई लव यू,”
“किसे कह रहे हो, मुझे या सिगरेट को?”

5 comments:

  1. मैं तुमसे प्‍यार करती हूं, तुम करते हो?”
    “तो अब ये भी तुम्‍हें बताने की ज़रुरत होगी?”
    “तुम्‍हें याद भी है लास्‍ट टाईम कब बताया था?”
    “क्‍या बताना था?”
    “यही कि मुझे प्‍यार करते हो, ईडियट?”
    QYA YAHI PYAR HAI
    HAN YAHI PYAR HAI

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  2. अये हय..बेलेंटाइन पोश्ट..
    ..ये ग्रिहस्थी की गाडी मे भी स्टेयरिंग बिचारा बैकसीट पे होता है..बीवी के हाथों मे..फ़्रंट सीट पर बस भोंपू होता है..ग्रिहस्थी का..बेचारा सारी जिंदगी बजता ही रहता होगा..यह विडालक्रीड़ा सच मे किसी भी व्हाटेवर डे की ही कहानी है..जिंदगी की कउरारोर का सेम म्यूजिक..हर सबेरे सेम ही बजता है राग भटियार की तरह..ज्यों दूरदर्सन की प्रातःकालीन सभा हो..
    देखने के कैंसर वाली यह ताजा बीमारी सुनी है..पोस्ट भी ऐसी की पढ़-पढ़ के एक्सपायरियाये कुआँरों को सोचने का कैंसर हो जाये.. :-)

    (अच्छा ये पोस्ट वाला फोटू परसो-ना का है क्या??)

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  3. @हां, अरपूर्ब, बीबी (एंडरसन) अपने अबहीं ले हाथ नै आये गिरहत्‍थी के दुख का बैलेंटाइन बोल रही है.. हम सुन सकते थे, लेकिन देख रहे ही हो, हमरी जगह फ्रेम लीब उल्‍टामन छेंकी हुई हैं..

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  4. शानदार रही ये भी। लव? लाइफ की रीयल रील।

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