Friday, April 27, 2012

औरत कहती है..

औरत कहती है दुख को पहचानना चाहती हूं
हंसकर आगे जोड़ती है, दुख को पहचानती औरत के बहाने
शायद इस अपने परिवेश को ज़रा नज़दीक से जान लूंगी
या ईमानदारी से कहूं, जानना चाहती हूं
कृपया मेरे थिर जीवन पर मत जाइए
ऐसे कई सवाल हैं जिनकी संगत में
जाने कहां किधर निकल जाती हूं  
बहुत बार घना कोई जंगल होता है
अजनबी आवाज़ें जोर का हंसना फुसफुसाहटें
सुख की दुकान के बाहर बहकी भीड़ में
कोई चहकता अभिवादन करता मिलता है
मालूम नहीं किस चरचे की तफ़सीलें गिनाता
अभागेपने की दहलीज़ पर अड़ा ठहाके लगाता
औरत संजीदगी में सिमटी एक कदम पीछे होती है
कहती है मैं सुख का आपका यह फटियारापन मापना चाहती हूं.
... 


(नीचे इसी का पॉडकास्‍ट है)



10 comments:

  1. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
    घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
    लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. पॉडकास्‍ट..दिनों बाद

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  3. @पुरखराज कुमारी,

    आपो तो बहुत दिन बाद मुंह खोली हैं, नहीं?

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  4. पोस्ट में पर्वतीय कटाक्ष, कविता में नदी जैसी संवेदना, पोस्टकार्ड में मनुष्यता भर संजीदगी...और बेक राउंड में अनर्गल की मिलावट... शुद्धता से इतना परहेज...

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  5. महीनों बाद आपको फिर से पढ़ना और सुनना हमेशा की तरह मन में हलचल पैदा कर गया....दुख और सुख को पहचानने की कोशिश में लगी औरत का ध्यान हटाने में पीछे की आवाज़ें अच्छा काम कर गईं.

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  6. @क्‍या ख़बर, नीरा?

    @ नमस्‍ते, मीनाक्षी जी..

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  7. पॉडकास्ट में जो एक आवाज़ है जो गलियारों में न भटकने देने के वास्ते सबसे छोटी ऊँगली पकड़े रहती है...भुतलाते भुतलाते भी विस्मृत नहीं होती....

    बाहर बारिश का बहुत अच्छा सा मौसम है...अच्छे मूड में घर वापस लौटी हूँ तो ये पॉडकास्ट मिलता है...अब कॉफी के साथ इसे रिपीट मोड में देर तक सुना जाएगा.

    नए पॉडकास्ट के लिए बहुत शुक्रिया.

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  8. @शूरकिरिया, दक्खिन के पंडिताइन..

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  9. अये-हये..इसी आवाज की तो उंगली पकड़ शोर के घने जंगल मे खो जाने का दिल करता है!!..मगर जिंदगी कहां थिर रहती है..सुख की गिरहकटी करने मे कटी जाती है..दुख खुद ढूंढ लेता है अपने शिकार को..औरत जरा से सुख की आकांक्षा साड़ी के कोर मे बांध कर फिर भारी दुख की चक्की मे अपनी उमर पीसती रहती है..सुख का फटियारापन मापते-मापते बढ़ता जाता है...

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