कौतुक के अंधेरे में चोटखायी चिड़िया फिर उड़ जाती होगी
नीम की पत्तियों में जागकर हाथी का छौना कोई घबराने लगता होगाबनिये की अटारी में अंड़से जाने किस ज़माने की कालिख घिरे लालटेन
चिटककर शिकायती आवाज़ लगाने लगते होंगे, कपड़ा फिरानेवाला कोई है, भाई अरे ओ?
पुराने क़िस्सों का मशहूर, कब का भुलाया नचनिया, बैठता होगा कीच चढ़े ईनारे
हारे, दिनों पुरानी दाढ़ी की खूंट सहलाता, सहेजता टीन के तीन बेमतलब सामान
जब तब हल्ले में जागना होता होगा- और फिर बहुत बहुत रातें
जागना, जागे रहना किन्हीं लम्बी नींदों में
घर का भागा पसलियां घायल किये लड़का मदद की गुहार में
झूलकर खिड़की पर रोता होगा, आसमानी कैलेंडर पर उड़ता जहाज
अटक-अटककर उड़ता, पीछे कोई चुपके बुदबुदाता
किस भाषा में उड़ते हो, जहाज?
लाला के नये छापेखाने की दीवार गंदा किये जाता होगा दुखियारा भंगी
चिपकाये उस पर अस्पतालों का अन्तरंग गुप्त इतिहास
कमली और विमली दो बहनें जुड़वां, शहर के औंजाईन में भागकर
कभी भी चली आती होंगी, बजाती नींद का उखड़ा दरवाज़ा
छत के बंद में बेतहाशा दौड़ता मुन्ना घुड़कता होगा, ऐ लड़कियो
दिखता नहीं इमारत में कुआं खुद रहा है, पंडितजी खाली शीशियां
बेचने गांव गए हैं, और हम आंख मूंदकर चोरी करना सीख रहा हूं
राधेमोहन (जूनियर) लोटे में सतुआ घोलते, रोती नीरजा थाली के कोने
सहजन की चबाइन सहेजती, जिला डिपो का बस मुकुंद दुआरे
चला आता होगा, गो उसमें चढ़ने को अब मुकुंद स्वाईं नहीं होते होंगे
जैसे घुटने की चोट होती होगी, हंसते मुन्ने का मुखड़ा, दौड़ना नहीं होता होगा
धूल औ’ सूख गुज़रे बहुत सारे फरियाये, अझुराये कागज़-पत्तर होंगे
सारंगी से निकलकर तैरता, तैरा जाता मीठा
सीधा कोई हिसाब नहीं ही होता होगा
नीम और कहां कितने हकीमों के ऊपर
सलेटी आसमान की खुरदुरी बांहों में
चिड़िया अब भी अटक-अटककर उड़ती
हाथी का छौना चौंक-चौंककर जागता
- नींद चौंकन्नी, चुप्पै जागे की गिनती गिनती होगी.
(स्केच, फेथमाउस ब्लागस्पॉट से साभार)

No comments:
Post a Comment