Wednesday, July 25, 2012

हे जॉर्ज, अमरीकी, स्‍टैंड-अप..

देश के भूगोल में अवस्थित एक जीवन की कितनी कहानी होती है, सिर्फ़ उतना भर ही नहीं होती जो विकी बताती है, या स्‍वयं व्‍यक्ति बताता दीखता है. क्‍योंकि बहुत बार तो परिस्थितिगत ठंसाव में व्‍यक्ति विशुद्ध कविता हुआ जाता है. हमारे तथाकथित अधिकारों के शमशान को, भगवान को सिर के बल खड़ा करता, या टंगी जाती भाषा के बाहर खड़ा उसकी टांग खींचता.. ओह, स्‍टुपिड पिपल, एरोगैंट सफ़ेद पिपल, ओ पैनिकी, पथेटिक पैरेंट पिपल..

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