Sunday, July 21, 2013

अजनबी सांझें..

जामा मस्जिद पर इफ़तार, फ़ोटो: मीनू देसाई
सांझों के साथ जाने क्‍या कैसी कोई रहस्‍यकथा चलती रहती है, कि उसके तार पहचानना, उसकी संगत में मिजाज़ दुरुस्‍त रखना, एकदम दुश्‍वार हो जाता है. इतने सारे रंगों में घुली, ‘कटी पतंग’ के किशोर कुमार वाले ‘ये शाम मस्‍तानी..’ में सजी, सांझ में कुछ ऐसा होता है कि हमारे हाथ लगाते ही रंगों की सारी गुफ़्तग़ू हवा हो जाती है. खाली सूनसान दूर-दूर तक बस एक रंगहीन मैदान तैरता, पसरा नज़रों में सवालों के जाल बुनता चला जाता है.. जबकि बहुत सारे तन्‍नुओं की तरह ‘बहके-महके-से गुज़र जाने’ की हमारी कहानी भी हो सकता था, आह, नहीं होता..

..तन्‍नू ने वह रास्‍ता पकड़ लिया जिससे उत्‍तर पट्टी वाले आज भी दसवीं का जुलूस लेकर गुज़रते हैं. उसको फुस्‍सू मियां के यहां जाना नहीं था. वह तो बस अकेला रहना चाहता था, ताकि बिछुड़ी हुई यादों से मिल सके और टूटे हुए रिश्‍तों को जोड़ सके. ज़मीन से आदमी का कोई रिश्‍ता ज़रूर होता है वरना रूम (रोम) के अज़ीम खंडहर देखने के बाद और अहराम से आंखें मिलाने के बाद कोई गंगौली के कच्‍चे मकानों और काली मिट्टी की तरह सोंधे-सोंधे लोगों में वापस आकर खुश कैसे हो सकता है! मिट्टी की इन इन दीवारों में तो कोई हुस्‍न भी नहीं है. काली मिट्टी के इन आदमियों में कोई ख़ास बात नहीं है. क्‍या रक्‍खा है इन हकीम अली कबीरों और मौलवी बेदारों में! क्‍या रक्‍खा है इन फुन्‍नन मियाओं और हम्‍माद मियाओं में! क्‍या रक्‍खा है इस झंगटिया-बो, इस सैफ़ुनिया, बछनिया, रब्‍बन-बी, कनीज़ और सक़ीना में! मगर लोग इन्‍हीं के लिए कलकत्‍ता, बंबई, कानपुर और ढाका के जीते-जागते बाज़ारों से लौट आते हैं. तन्‍नू ने ये बातें नहीं सोचीं. वह ये बातें सोच भी नहीं सकता था. वह तो सिर्फ़ यह जानता था कि गंगौली आकर वह खुश है. वह यह जानता है कि रब्‍बन की बूढ़ी आंख देखने के लिए वह तड़प उठा करता था और उसे सईदा याद आया करती थी जो छह बरस में बिलकुल जवान हो गयी है. वह मुस्‍करा दिया और फुस्‍सू मियां के घर का रास्‍ता छोड़कर सिब्‍तू मियां के घर से होता हुआ अग्‍गू मियां के घर में चला गया.

‘घड़ी में सांझ का क्‍या बखत हुआ है, भाई साहब?’

चुप. एकदम चुप.

सुनते हैं स्‍टेशन से लगी पीछे वाली सड़क पर आज फिर किशोर कुमार के कुछ पुराने गानों की चोरी हुई है!

1 comment:

  1. आधा गांव फ़िर से पढ़ने का मन हो आया आपकी इस पोस्ट को पढ़कर! :)

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