Sunday, July 7, 2013

गैरबराबरी गुंठियां, इंडिया..

“पैसा, पैसा, पैसा, पैसे के सिवा हमारे पास सोचने को और कुछ नहीं? यही, यही, इतना भर ही है हमारा जीवन?” – मुकुदंन, रात के सवा नौ बजे, सिनेमा हाल से बाहर पीछे की नल्‍ली गली में.
 “’पैसा मिलना’- वेरियेर में हर बात को निर्धारित करनेवाला जादू का मन्‍त्र यही है. यहां की तीन-चौथाई से अधिक आबादी के लिए यह अपने आप में एक विचारणीय विषय बना रहता है. इतने सुन्‍दर दिखाई पड़नेवाले इस छोटे-से शहर में हर बात का असली कारण ‘पैसा मिलना’ ही है.” – स्‍तान्‍धाल, ‘सुर्ख़ और स्‍याह’, 1830 का फ्रेंच कस्‍बाई ज़माना.
 “द रिचनेस ऑफ़ द हार्ट, सेंसिबिलि‍टीज़, इमोशंस, इट्स ऑल फेक, ए पुट ऑन एंड शो टू डिस्‍ट्रैक्‍ट एंड कन्‍फ़्यूज़ वलनरेबल व्‍युअर्स, जहां टमाटर खाना तक दुश्‍वार हो, जहां अभी भी हर वर्ष दुनिया के किसी भी हिस्‍से से ज्‍यादा बच्‍चे डायरिया या आम बिमारियों की बेमतलब मौतें मरते हों, सोचो, पांच साल से कम उम्र के सत्रह लाख, हर साल.. और पांच साल से ऊपर जिन्‍हें किसी तरह जीवन का ईनाम मिल जाता है उसमें भी 48 फ़ीसदी उपयुक्‍त आहार के अभाव में कटे-पिटे बड़े होते है. इरिट्रिया जैसे झंट मुल्‍क में भी हमसे बेहतर बच्‍चों का पोषण है, और ऐसे मुल्‍क में घंटा आप सेंसिबिलिटीज़ की बात करते हो!” –प्रोमोद कोमार गांगोली, चिरैया टांड़ पुल के नीचे, अभी-अभी गंदे-उबकाई मारते दीवार पर पेशाब करके फारिग होते, पैंट में उल्‍टा हाथ पोंछते हुए.
 “South Asia fares distinctly worse than sub-Saharan Africa. More than 40 per cent of South Asian children (and a slightly higher proportion of Indian children) are underweight in terms of WHO norms, compared with 25 per cent in sub-Saharan Africa... Likewise, the most basic health measure that any government can provide for its people is to immunise very young children but, in India, only 43.5 per cent of children are completely immunised, compared to 73.1 per cent in Bangladesh: “India is falling behind every other South Asian country, with the exception of Pakistan, in terms of social indicators.” For instance, life expectancy was the same in India and in Bangladesh in 1990 but today it is “four years higher in Bangladesh than India, 69 and 65 respectively. Similarly, child mortality, a tragic indicator, was estimated to be about 20 per cent higher in Bangladesh than India in 1990, but has fallen rapidly in Bangladesh to now being 25 per cent lower than in India by 2011.
In sub-Saharan Africa, only eight out of 25 countries have immunisation figures as bad as India’s. India’s adult literacy is not quite the lowest in the world but, at 65 per cent, it is the same as in Malawi and Sudan. Adult literacy in China, by comparison, is 91 per cent. So bad is the situation that Sen and Drèze go as far as stating that Indian democracy is “seriously compromised by the extent and form of social inequality”. – डैरलिंपल, न्‍यू स्‍टेट्समेन में अर्मत्‍य सेन और ज़्यां द्रेज़ से सिर भिड़ाते हुए.
 “मगर पिछले दो दशकों में इंडिया कितना मनीड हुआ है, एक्‍सेप्‍ट करोगे नहीं? भेड़-बकरी की तरह बांगाली रा योरोप-टुरोप घूमने जा रहा है? ये सही है कि सब्‍जी खरीदारी करते समय अब डर लगता है, पेट्रौल का रेट भी कब बढ़ जायेगा सोचके धुकधुकी बनी रहती है, बट अमीराती तो बढ़ा है, हां कि ना?” – नीलोत्‍पल मोइत्रा, बांस बहाल बस डिपो के बाहर गुमटी पर सिगरेट खरीदते, और सिगरेट की कीमत पर हुज्‍जत करते हुए.
 “A quarter of the Indian population.. remain effectively illiterate”. Physical infrastructure is badly neglected: “The general state of public services in India remains absolutely dismal, and the country’s health and education systems in particular have been severely messed up.” Even today, a third of Indians do not have electricity, compared to 1 per cent in China. “Half of Indian homes remain without toilets, forcing half of all Indians to practise open defecation.” Wages in manufacturing in China have grown by 12 per cent since 2000, compared with 2.5 per cent in India, and 90 per cent of Indians still work in what is referred to as “the informal sector”. While India has climbed rapidly up the ladder of economic growth rates, it has fallen behind Nepal and Bangladesh in the scale of social indicators. Brazil, with much slower economic growth, has a far better record of poverty reduction. India remains an oddity among the Bric countries: “India’s per capita GDP is less than half of China’s, one third of Brazil’s and one fourth of Russia’s.” – डैरलिंपल, वही.
 “एइ शोबाई किंतु भीषोण.. दुर्दांत, दादा!” – राजा घोष, चार दिन बासी मिलावटी तेल में सिंघड़ा छानते हुए.

1 comment:

  1. "इरिट्रिया जैसे झंट मुल्‍क में भी हमसे बेहतर बच्‍चों का पोषण है, और ऐसे मुल्‍क में घंटा आप सेंसिबिलिटीज़ की बात करते हो!”

    भीषण! :)

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